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विटामिन डी से होने वाले रोग | Diseases caused by Vitamin D deficiency


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विटामिन डी विटामिन समूह का एक खास सदस्य है जोकि हमारे शरीर के लिए काफी आवश्यक है। खासतौर पर सूर्य से प्राप्त होने वाला यह विटामिन हमारे शरीर के सभी अंगों को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद करता है। प्रमुख रूप से हमारे हड्डियों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण होता है और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से भी लड़ता है। इसलिए इस महत्वपूर्ण पोषक तत्व के लिए हमने विटामिन डी से होने वाले रोग ब्लॉग को तैयार किया है।

इस ब्लॉग के माध्यम से हम आपको विस्तार से निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर देंगे ‌विटामिन डी क्या है, ‌विटामिन डी का महत्व, इसकी कमी के मुख्य कारण, ‌इसकी कमी से होने वाले रोग, ‌इसकी कमी को पूरा करने के लिए खाद्य पदार्थ, उपचार और रोकथाम। 


विटामिन डी क्या है (What is Vitamin D)

विटामिन डी विटामिन परिवार का एक सदस्य है और घुलनशील विटामिन की श्रेणी में आता है। यह हमारे शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण को बढ़ावा देता है और इसलिए हमारे दांतों और हड्डियों के लिए काफी जरूरी होता है। धूप, अंडे, मांस मछली, दूध और दूध के उत्पादों से विटामिन डी की प्राप्ति होती है।


खासतौर पर अगर आप रोजाना कम से कम आधे घंटे की धूप लेते हैं तो आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी की प्राप्ति हो जायेगी। अगर आपके शरीर में इसकी कमी हो जाती है तो आपको कई रोग हो सकते हैं जैसे रिकेट्स, ऑस्टियोमलेशिया, कैंसर आदि। इसके बारे में हम विस्तार से विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग सेक्शन में बात करेंगे।

विटामिन डी से होने वाले रोग (Diseases caused by Vitamin D deficiency)

अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाए तो आपको कई रोग हो सकते हैं। कुछ ऐसे रोग भी हैं जो जानलेवा होते हैं जैसे कैंसर। आइए विस्तार से जानते हैं कि विटामिन डी से होने वाले रोग कौन से हैं।

 

1. बच्चों में रिकेट्स हो सकता है (Vitamin D deficiency can cause Rickets)

विटामिन डी का सबसे प्रमुख कार्य है हड्डियों और मांशपेशियों को स्वस्थ और मजबूत रखना। ऐसे में अगर इसकी कमी शहरी में हो जाती है तो हड्डियों में दर्द, कोमलता, सूजन और पतलापन आ सकता है जोकि रिकेट्स के लक्षण हैं। आमतौर पर रिकेट्स बच्चों में ही होता है लेकिन वयस्क भी इससे ग्रसित हो सकते हैं। इस रोग से ग्रस्त होने पर आपकी हड्डियां काफी कोमल हो जाती हैं इसलिए उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

साथ ही, रिकेट्स से जूझ रहे लोगों में उनके हाथ पैर काफी पतले हो जाते हैं और उनमें अक्सर दर्द उठता है। इसके अलावा हाथ और पैरों में सूजन की समस्या भी रिकेट्स से ग्रसित लोगों में हो सकती है। 


2. विटामिन डी की कमी से ऑस्टियोमलेशिया हो सकता है (Vitamin D deficiency can cause Osteomalacia)

शायद आपने आज से पहले कभी ऑस्टियोमलेशिया का नाम नहीं सुना होगा। जिस प्रकार बच्चों में रिकेट्स की समस्या होती है तो ठीक उसी तरह विटामिन डी की कमी से वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया रोग हो जाता है। इस रोग में सबसे पहले हड्डियां कमजोर और कोमल हो जाती हैं जिससे उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, इस रोग से ग्रसित व्यक्ति काफी कमजोरी और थकावट भी महसूस करते हैं।

इसके अलावा हाथ पैरों का पतला होना, मांशपेशियों में कमजोरी होना, हाथों और पैरों में सूजन आदि इस रोग के प्राथमिक लक्षण हैं। अगर समय रहते इस बीमारी को दूर नहीं किया गया तो आगे चलकर व्यक्ति कई गंभीर हड्डियों से जुड़ी बीमारियों से ग्रस्त हो सकता है।

 

3. विटामिन डी की कमी से होता है ओस्टियोपोरोसिस (Vitamin D deficiency causes Osteoporosis)

भारत में बड़ी ही तेजी से ऑस्टियोपोरोसी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ओस्टियोपोरोसिस जिसे गठिया रोग भी कहा जाता है, एक ऐसी स्तिथि है जिसमें हड्डियां काफी कमजोर हो जाती हैं और उनके टूटने का खतरा हमेशा बना रहता है। इस रोग से ग्रसित लोगों के घुटने और जोड़ों में दर्द और जकड़न होता है और एक समय ऐसा भी आता है कि उनका पूरी तरह से चलना फिरना बंद हो जाता है। 

इस रोग में शरीर की सभी हड्डियां खासकर कि जोड़ इतने ज्यादा कमजोर हो जाते हैं कि एक जोर से खांसी भी उन्हें तोड़ने में कामयाब हो सकता है। बाहर से सामान्य सा दिखाई देने वाला हड्डी अंदर से खोखला और कमजोर हो जाता है। यह समस्या खासतौर पर वृद्ध लोगों में होती है लेकिन वर्तमान में अचानक से जवान लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इस परेशानी में फिश आयल कैप्सूल आपकी मदद कर सकता है, ज्यादा जानकारी के लिए fish oil capsules benefits in hindi पढ़ें।


4. आप अवसाद के शिकार हो सकते हैं (Vitamin D makes depression prone)

जी आपने बिल्कुल सही पढ़ा, अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाए तो आप अवसाद के शिकार भी हो सकते हैं। अवसाद जिसे आजकल डिप्रेशन के नाम से प्रसिद्ध किया गया है, एक ऐसी स्तिथि है जिसमें व्यक्ति लागतार निराश महसूस करता है, उसकी किसी भी चीज ने रुचि खत्म हो जाती है, आत्महत्या के विचार आते हैं, अनियमित निद्रा और अनियमित भूख की समस्या होती है।

अवसाद एक ऐसी स्तिथि है जिसे कई मायनों में परिभाषित करना भी कठिन है लेकिन यह कैंसर से भी खतरनाक साबित हो सकती है। विटामिन डी की कमी से भी यह हो सकता है क्योंकि विटामिन डी मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन को प्रभावित करता है। ये न्यूरोट्रांसमीटर मूड, मनोदशा और खुशी को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विटामिन डी की कमी से इन न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन में कमी आ सकती है, जिससे अवसाद का खतरा बढ़ सकता है।


5. बालों का झड़ना शुरू हो जाता है (Hair loss due to vitamin D deficiency)

बालों का झड़ना कोई रोग तो नहीं है लेकिन विटामिन डी की कमी से होने वाली समस्याओं में यह भी एक प्रमुख समस्या है। अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है तो आपके बाल झड़ना शुरू हो जाते हैं और नाखून भी काफी नाजुक हो जाते हैं जिससे आपको कई कार्यों में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। 

बालों के सही विकास के लिए विटामिन डी की आवश्यकता होती है और अगर इसकी ही कमी हो जाए तो बाल कमजोर हो जाते हैं और फिर हैरफाल का दौर शुरू हो जाता है। तो ऐसे में पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी का सेवन आवश्यक हो जाता है। अगर आपके बाल झड़ रहे हैं तो यह कई कारणों से हो सकता है, Traya का फ्री हेयर टेस्ट दें और सटीक समस्या का पता लगाकर उसका सही इलाज भी तुरंत पाएं। इसके साथ ही, आप biotin tablets uses in hindi की मदद से भी बालों का झाड़ना रोक सकते हैं।


विटामिन डी की कमी के लक्षण (Symptoms of Vitamin D Deficiency)

जब आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है तो इसके कई लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। आइए संक्षेप में इन सभी लक्षणों की जानकारी हम आपको देते हैं। 

 

1. हड्डियों में कमजोरी होना 

विटामिन डी की कमी का सबसे पहला लक्षण होता है हड्डियों में कमजोरी। विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है परंतु अगर इसकी कमी हो जाए तो हड्डियों को भी कैल्शियम की कमी हो जाती है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।


2. मांशपेशियों और जोड़ों में दर्द

विटामिन डी की कमी से मांशपेशियों और हड्डियों में दर्द होना शुरू हो जाता है। खासतौर पर इसकी कमी से जोड़ों में दर्द होना आम है। यह दर्द आप सामान्य रूप से पीठ और पैर की हड्डियों में महसूस करेंगे।


3. बालों का झड़ना

विटामिन डी की कमी से बालों का झड़ना भी शुरू हो जाता है। हालांकि बालों के झड़ने के अन्य कई कारण भी हो सकते हैं लेकिन विटामिन डी की कमी भी एक प्रमुख कारण है।


4. अत्यधिक थकाव और तनाव

विटामिन डी की कमी का एक लक्षण यह भी है कि आप अत्यधिक थकान और तनाव महसूस करते हैं। खासतौर पर इसकी कमी से आप अत्यधिक थकान को महसूस कर सकते हैं।


5. बार बार संक्रमण के चपेट में आना

जब आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है तो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है। इस वजह से आप बार बार संक्रमण के चपेट में आने लगते हैं।


विटामिन डी 3 की कमी के लक्षणों की जानकारी 

अगर आपके शरीर में विटामिन डी3 की कमी हो जाती है तो शरीर में कई लक्षण दिखाई देने शुरू हो सकते हैं। इसकी कमी से शरीर में थकावट, कमजोरी, हड्डियों में कमजोरी, मोटापा, बार बार संक्रमण लग्न जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आइये विटामिन डी 3 की कमी के लक्षणों को समझाते हैं:

  • थकान
  • मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी
  • हड्डियों में दर्द
  • मोटापा
  • बार-बार संक्रमण
  • डिप्रेशन
  • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं

इसके साथ ही कई पर परिस्तिथि गंभीर भी हो जाती है। बात करें अगर विटामिन डी 3 की कमी से होने वाले रोग के बारे में तो ह्रदय रोग, रिकेट्स और ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। अगर आपके शरीर में इसकी कमी हो जाती है तो आप डॉक्टर की सुझाव के पश्चात, multivitamin tablet uses in hindi का सेवन कर सकते हैं।

महिलाओं में विटामिन डी की कमी के लक्षणों की जानकारी 


अगर आप एक महिला हैं तो विटामिन डी की कमी के कई लक्षण आपमें दिखाई दे सकते हैं। इसमें शामिल है थकान, मांशपेशियों में दर्द, जख्म भरने में देरी, अवसाद आदि। इसके साथ ही अगर आप गर्भवती हैं तो विटामिन डी की कमी के लक्षण गंभीर हो सकते हैं जैसे:

  • कैंसर
  • मधुमेह 
  • मोटापा
  • भ्रूण का सही से विकास न होना

विटामिन डी का महत्व (Importance of Vitamin D)

विटामिन डी हमारे शरीर के लिए काफी महत्वपूर्ण है और सभी शारीरिक अंगों को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह महत्वपूर्ण होता है। हमारा पूरा शरीर हड्डियों और मांशपेशियों से ही निर्मित हैं और इन्हें स्वस्थ रखने के लिए विटामिन डी की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही, यह हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए भी काफी जरूरी होता है। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर को संक्रमण से बचाता है।

साथ ही, यह कई प्रकार के कैंसर से भी शरीर की रक्षा करता है। कई शोधों से यह बात पता चली है कि विटामिन डी स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को कम करता है और आपकी इस जानलेवा बीमारी से रक्षा करता है। इसके अलावा, यह आपकी त्वचा और बालों के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए भी जरूरी है। तो ऐसे में अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है तो आपको कई रोगों का सामना करना पड़ता है इसलिए इसके महत्व को समझते हुए आपको जरुरी कदम उठाने चाहिए।


विटामिन डी की कमी कैसे पूरी करें ? (How to fulfill Vitamin D deficiency)

अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो गई है तो चिंता की बात नहीं है। आपके पास कुल तीन ऐसे तरीके हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने शरीर को दोबारा से विटामिन डी प्रचुर मात्रा में प्रदान कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि विटामिन डी कैसे बढ़ाएं:


1. पर्याप्त मात्रा में धूप लें (Get enough sunlight)

अगर आप आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो गई है और आप इस कमी को पूरा करना चाहते हैं तो सबसे सस्ता और आसान तरीका है पर्याप्त मात्रा में धूप लेना। जी हां, आप आगे रोजाना पर्याप्त मात्रा में धूप लेते हैं तो आपके शरीर में विटामिन डी की कमी होगी ही नहीं। 

जैसे ही आपकी त्वचा सूर्य की रोशनी के संपर्क में आयेगी, विटामिन डी का उत्पादन तुरंत ही शुरू हो जाएगा। हालांकि, इससे sunburn हो सकता है इसलिए आप sunscreen का इस्तेमाल जरूर करें।


2. विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं (Eat Vitamin D Rich Foods) 


दूसरा तरीका है संतुलित आहार लेने का, जिसमें आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी आसानी से मिल जायेगा। खासतौर पर अगर आप अपने आहार में मछलियां जैसे सालमन, टूना, मैकेरल और सैल्मन, अंडे की जर्दी, फलों के रस, अनाज, और डेयरी उत्पादों को शामिल करते हैं तो पर्याप्त मात्रा में आपको इनसे विटामिन डी की प्राप्ति हो जायेगी।

अगर आप शाकाहारी हैं तो पर्याप्त मात्रा में धूप लेने के साथ ही, दूध उत्पादों का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा फलों के रस का सेवन भी आपके शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा करेगा।


3. विटामिन डी सप्लीमेंट्स लें (Vitamin d supplements)


अंत में तीसरा रास्ता है विटामिन डी के सप्लीमेंट्स लेने की, जोकि आपको आसानी से मेडिकल की दुकानों पर मिल जायेगा। इन सप्लीमेंट में भरपूर मात्रा में विटामिन डी की मौजूदगी होगी जिससे आपके शरीर को आसानी से इसकी कमी पूरी हो सकेगी।

आप चाहें तो विटामिन डी का सप्लीमेंट इस्तेमाल करने के बजाय मल्टीविटामिन टैबलेट का भी सेवन कर सकते हैं। इनमें न सिर्फ आपको विटामिन डी बल्कि अन्य सभी विटामिन सदस्य मिल जायेंगे जो आपके शरीर को स्वस्थ और निरोग रखने में मदद करेंगे। तो इस तरह आपने जाना कि विटामिन डी कैसे बढ़ाएं।


विटामिन डी की कमी का उपचार (Vitamin D deficiency treatment) 


अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो गई है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर उन्हें लगता है कि वाकई आपके शरीर में विटामिन डी की कमी है तो वे आपको दो से तीन सलाह देंगे जिसपर हमने ऊपर भी बात किया है:


  • ‌पर्याप्त मात्रा में धूप लें
  • ‌विटामिन डी से भरपूर भोजन का सेवन करें
  • ‌विटामिन डी सप्लीमेंट्स लें 

अगर आप विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग से जूझ रहे हैं तो फिर ऊपर दिए गए सुझावों के अलावा डॉक्टर कई दवाइयां और उपचार और टेस्ट प्रेस्क्राइब कर सकते हैं। हम आपको सुझाव देते हैं कि नियमित रूप से धूप लें, अगर आप धूप नहीं के सकते हैं टी इसके सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर दें और साथ ही, अगर इसकी कमी से कोई बीमारी हो गई है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


विटामिन डी से युक्त खाद्य पदार्थ (Vitamin D rich foods) 


विटामिन डी से भरपूर कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका आप सेवन कर सकते हैं। आइए एक नजर डालते हैं उन खाद्य पदार्थों की सूची पर:


  • ‌वसायुक्त मछलियां
  • ‌दूध के उत्पाद
  • ‌आम 
  • ‌केला 
  • ‌नारंगी
  • ‌अंगूर
  • ‌स्ट्रॉबेरी

यहां हम आपको एक महत्वपूर्ण बात बताते चलें कि इन फलों में विटामिन डी की मात्रा बहुत ही कम पाई जाती है। ऐसे में मात्र इनके सेवन भर से आपको दैनिक जरुरत की विटामिन डी नहीं मिल सकेगी जोकि 600 IU है। जो लोग पर्याप्त धूप नहीं लेते और शाकाहारी हैं उनमें खासतौर पर विटामिन डी की कमी पाई जाती है इसलिए उन्हें फलों पर निर्भर रहने के बजाय सप्लीमेंट्स लेना चाहिए। 


निष्कर्ष (Conclusion)

विटामिन डी विटामिन परिवार का एक सदस्य है जोकि शरीर को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद करता है। खासतौर पर यह शरीर की हड्डियों और मांशपेशियों के स्वास्थ्य को बेहतर करता है, अवसाद से बचाता है और ओस्टियोपोरोसिस जैसे रोग को दूर रखता है। इसकी कमी हमें कुछ खाद्य पदार्थों और सूर्य की रोशनी से होती है।

हालांकि, अगर आप पर्याप्त मात्रा में धूप नहीं लेते और शाकाहारी हैं तो इसके सप्लीमेंट्स ले सकते हैं। विटामिन डी की कमी से रिकेट्स, ओस्टेपोरोसिस, अवसाद आदि समस्याएं हो जाती हैं। साथ ही, इसकी कमी से कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked question)

1. विटामिन डी की कमी को कैसे पहचानें?

विटामिन डी की कमी को पहचानना काफी आसान है। अगर आप अपनी हड्डियों और मांसपेशियों में कमजोरी का अनुभव कर रहे हैं, आपके बाल तेजी से झड़ रहे हैं, आपको अक्सर थकान महसूस होती है, आप अचानक से चिंतित और उदास हो जाते हैं और आपकी भूख अनियमित है तो इसका अर्थ है कि आप विटामिन डी की कमी से पीड़ित हैं।


2. विटामिन डी की कमी के कारण क्या हो सकते हैं?

विटामिन डी की कमी का मुख्य कारण होता है पर्याप्त मात्रा में धूप न लेना। अगर आप पर्याप्त मात्रा में धूप नहीं लेते, संतुलित आहार का सेवन नहीं करते हैं तो विटामिन डी की कमी हो सकती है। 


3. बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षण क्या हैं?

बच्चों में विटामिन डी की कमी का लक्षण है रिकेट्स रोग, जिसमें बच्चों के हाथ और पतले और बेजान हो जाते हैं और कमजोर हो जाते हैं। साथ ही हाथ और पैरों में सूजन और दर्द होने लगता है और साथ ही, हाथ पैर कोमल बन जाते हैं जिससे उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है।


4. विटामिन डी की कमी से होने वाली मुख्य स्वास्थ्य समस्याएं क्या हैं?

विटामिन डी की कमी से होने वाली कुछ मुख्य समस्याएं हैं अवसाद, रिकेट्स, ओस्टियोपोरोसिस, बालों का झड़ना, ऑस्टियोमलेशिया और थकावट।


5. विटामिन डी की कमी के लिए कौन से टेस्ट करवाए जा सकते हैं?

विटामिन डी की कमी के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। ब्लड टेस्ट के माध्यम से पता चल जाता है कि आपके शरीर में इसकी कमी है या नहीं। यदि आपके रक्त में 25(OH)D का स्तर 20 ng/mL से कम है, तो आपको विटामिन डी की कमी हो सकती है।


6. विटामिन डी की कमी को दूर करने में कितना समय लगता है?

विटामिन डी की कमी को दूर करने में न्यूनतम 2 महीने लग सकते हैं। यह अवधि व्यक्ति की समस्या, खान पान और दैनिक आदतें के हिसाब से भिन्न भिन्न हो सकता है। 


7. विटामिन डी की कमी के उपचार में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ?

विटामिन डी की कमी के उपचार के समय आपको अपने डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी बातों का पालन करना चाहिए। इसके अलावा, अगर आप किसी अन्य दवा का सेवन करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


8. विटामिन डी की कमी का गर्भावस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है?

विटामिन डी की कमी से गर्भवती महिलाओं को प्रीक्लेम्पसिया का सामना करना पड़ सकता है। यह एक गंभीर स्तिथि है जिसमें मां और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक होता है। इसके साथ ही, शिशु का वजन कम होना और समय से पहले जन्म होने का खतरा बढ़ जाता है।


9. विटामिन डी की कमी से कौन सा रोग होता है?

विटामिन डी की कमी से रिकेट्स, ऑस्टियोपोरोसिस, मोटापा, ओस्टियोमलेशिया, शरीर में दर्द और कैंसर का खतरा बढ़ना। इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि पर्याप्त मात्रा में धुप लें, संतुलित आहार का सेवन करें और अगर आवश्यक हो तो विटामिन डी के सप्लीमेंट लें।


References

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Dr. Shailendra Chaubey, BAMS

Ayurveda Practioner

A modern-day Vaidya with 11 years of experience. He is the founder of Dr. Shailendra Healing School that helps patients recover from chronic conditions through the Ayurvedic way of life.

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