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पीरियड कम आने के नुकसान


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पीरियड यानि माहवारी प्रजनन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। पीरियड आना यह सुनिश्चित करता है कि आप गर्भ धारण करने के योग्य हैं। साथ ही पीरियड्स आने की वजह से ही ओवुलेशन पीरियड का पता चलता है, हार्मोन के स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है और साथ ही गर्भाशय से पुराने ऊतकों को निकालने में मदद मिलती है। लेकिन ये तो रहे पीरियड आने के फायदे, लेकिन क्या आपको पता है कि पीरियड कम आने के नुकसान क्या हैं?

पीरियड कम आना या बिलकुल न आना कई बार एक खतरनाक स्तिथि हो सकती है क्योंकि यह न सिर्फ यह दर्शाता है कि आपके शरीर में हार्मोन्स का संतुलन ठीक नहीं है बल्कि गर्भ धारण करने या बच्चा पैदा करने की क्षमता को भी नकारात्मक ढंग से प्रभावित करता है। पीरियड कम आने के नुकसान ढेरों हैं और इसलिए हमने इस ब्लॉग को आपके लिए तैयार किया है। इसकी माध्यम से आप पीरियड कम आने से सबंधित हर प्रश्नों का जवाब जानेंगी।


पीरियड कम आना क्या होता है (What is Light period)

पीरियड कम आने का अर्थ है कि पीरियड यानि माहवारी के दौरान रक्त का कम निकलना। 2022 की समीक्षा में हल्के या कम पीरियड को 5 मिलीलीटर (एमएल) से कम रक्त हानि के रूप में परिभाषित किया गया है, जो लगभग 1 चम्मच के बराबर है। यानि अगर पीरियड के दौरान 5 ml से कम खून निकल रहा है तो इसे लाइट पीरियड या पीरियड कम आना कहा जा सकता है। इसे हाइपोमेनोरिया भी कहा जाता है।

साथ ही, पीरियड कम आने की अवधि भी छोटी होती है। आमतौर पर महिलाओं में पीरियड 5 से 7 दिनों तक के लिए आते हैं लेकिन जब पीरियड कम आने की समस्या होती है तो यह दिन घटकर 2 से अधिकतम 3 ही रह जाते हैं। हालांकि कम पीरियड का आना या पीरियड सिर्फ 2 से 3 दिन तक ही सीमित होना कोई बड़े खतरे की ओर संकेत नहीं देता है। लेकिन अगर ऐसा लगातार हो रहा है तो कुछ दिक्कतें हो सकती हैं।


पीरियड कम आने के नुकसान (Period Kam Aane Ke Nuksan)

पीरियड कम आने के कई नुकसान हो सकते हैं। आमतौर पर पीरियड के दौरान खून कम आने से कोई बड़ी दिक्कत नहीं होती है लेकिन अगर यह लंबे समय तक जारी रहता है तो आपको निम्नलिखित समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।


1. ओवुलेशन पीरियड ट्रैक करने में परेशानी (Difficulty tracking ovulation period)

अगर आप गर्भधारण यानि प्रेगनेंट होना चाहती हैं तो Ovulation period आपके लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। ओव्यूलेशन मासिक धर्म चक्र का एक चरण है जहां अंडाशय से एक अंडा निकलता है। इस दौरान संभोग करने से गर्भ धारण करने की संभावना अधिक होती है। आमतौर पर आपके पीरियड शुरू होने के 12 से 16 दिनों बाद यह चरण आता है। 

ऐसे में अगर आपका पीरियड अनियमित है और कम पीरियड आने की दिक्कत से आप परेशान हैं तो आपको ओवुलेशन पीरियड ट्रैक करने में दिक्कत हो सकती है। खासकर कि अगर आप प्रेगनेंट होने चाहती हैं तो आपको ओवुलेशन पीरियड को ट्रैक करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। 


2. गर्भ धारण करने में दिक्कत हो सकती है (Difficulty in conceiving)

अगर आप कम पीरियड आना या पीरियड में कम ब्लीडिंग होना की समस्या से परेशान हैं तो आपको प्रेगनेंट होने यानि गर्भ धारण करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसकी पहली वजह तो हमने आपको पहले ही बता दिया है कि कम पीरियड आने से आप ओवुलेशन पीरियड को ट्रैक नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा, अगर आपका पीरियड कम आता है या रुक रुक कर आता है तो हो सकता है कि ओवुलेशन की प्रक्रिया नियमित न हो।

ओवुलेशन यानि अंडाशय से अगर अंडा निकलने की प्रक्रिया नियमित नहीं होगी तो स्पर्म अंडे के साथ मिलकर फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया नहीं शुरू कर पाएगा। गर्भ धारण के लिए पुरुष स्पर्म का महिला के एग्स से मिलना आवश्यक होता है। 


3. शरीर में हार्मोन्स असंतुलित हो सकते हैं (Hormonal Imbalance)

पीरियड में कम ब्लीडिंग होना या पीरियड कम आने का नुकसान यह भी है कि शरीर में मौजूद विभिन्न हार्मोन्स असंतुलित हो सकते हैं। शरीर में हार्मोन्स का असंतुलन गर्भ धारण करने में परेशानी खड़ी करने के साथ ही हड्डियों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है।  इसके अलावा अगर शरीर में हार्मोन्स असंतुलित हो जाएं तो थायराइड, पीसीओएस, मुंहासे, अनचाही जगहों पर बाल बढ़ना जैसी कई दिक्कतें शुरू हो सकती हैं।

खासतौर पर शरीर में हार्मोन्स का असंतुलन PCOS यानि पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम को जन्म देता है जिसका आमतौर पर पूरी तरह से इलाज नहीं किया जा सकता है। पीरियड कम आने के नुकसान में वजन बढ़ना भी शामिल है क्योंकि हार्मोन्स का असंतुलन थायराइड हार्मोन के स्तर को कम कर सकता है जोकि मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देगा। इससे आपका वजन बढ़ेगा जोकि बिल्कुल भी स्वास्थ्यवर्धक नहीं है।


4. ओस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है (Risk of developing osteoporosis may increase)

ओस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की हड्डियां खासतौर पर जोड़ों में कमजोरी आ जाती है और वे कोमल हो जाते हैं। हड्डियों में इस हद तक कमजोरी आ जाती है कि कई बार एक तेज छींक भी उन्हें तोड़ने के लिए काफी हो जाती है। यह बीमारी आमतौर पर बुजुर्गों में होती है लेकिन अगर आपका पीरियड कम आता है यानि अगर ब्लीडिंग कम होती है तो आपको भी ओस्टेपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है। परंतु ऐसा होता क्यों है?

यह होता है एस्ट्रोजन की वजह से। महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन एक महत्वपूर्ण हार्मोन होता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन जब पीरियड कम आता है या पीरियड में ब्लीडिंग कम होती है तो अचानक से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और ओस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है। 


5. एंडोमेट्रियल कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है (Increased risk of endometrial cancer)

पीरियड का कम आना या बिलकुल न आना एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। ऐसा एक या दो बार में नहीं होता है, बल्कि जब एक लंबे समय तक आप पीरियड के कम आने या न आने की समस्या का अनुभव करती हैं तो गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है। गर्भाशय की परत मोटी होने की वजह से सबसे बड़ा जोखिम होता है गर्भधारण की क्षमता को, प्रेगनेंट होने में दिक्कतें होने लगती हैं।

इसके साथ ही, लंबे समय तक शरीर में हार्मोनल असंतुलन और एस्ट्रोजन में अचानक से हुई वृद्धि की वजह से गर्भ की परत मोटी हो जाती है जिसे एंडोमेट्रियम कहा जाता है। सामान्य आकार से अधिक होने पर यही आगे चलकर एंडोमेट्रियल कैंसर का रूप भी ले लेती है। 


6. मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है (Mental health may be affected)

पीरियड में कम ब्लीडिंग होना या पीरियड कम आने के नुकसान सिर्फ और सिर्फ पूरे शरीर पर ही नहीं बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। खासतौर पर अगर आप लंबे समय तक कम पीरियड आने या पीरियड न आने की समस्या यानि हाइपोमेनोरिया से परेशान रहते हैं तो शरीर में बड़ी ही तेजी से हार्मोनल बदलाव आते हैं और उनका संतुलन बिगड़ जाता है।

अचानक से हुए हार्मोनल असंतुलन की वजह से न सिर्फ थायराइड, ओस्टियोपोरोसिस जैसे रोग हो जाते हैं बल्कि मानसिक रूप से भी आप अस्वस्थ हो जाती हैं और कई बार यह अवसाद यानि डिप्रेशन का भी कारण बन जाता है। 


7. हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है (Risk of heart disease increases)

अगर आपको पीरियड बिलकुल ही नहीं आ रहे हैं तो इस समस्या को amenorrhea कहा जाता है। यह हाइपोमेनोरिया से ज्यादा हानिकारक स्तिथि होती है जिसमें जल्दी से जल्दी डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक हो जाता है। इस परिस्थिति में हृदय रोग का खतरा काफी बढ़ जाता है और लंबे समय तक अगर इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो हृदय विकार हो सकते हैं। इससे आप high blood pressure की समस्या से जूझ सकती हैं।

दरअसल इसका कारण भी Estrogen ही है। लगातार पीरियड न आना, कम आना या रुक रुककर आना एस्ट्रोजन के स्तर को घटाने का कार्य करता है। अगर आपके शरीर में अचानक से काफी तेजी से एस्ट्रोजन का स्तर कम हुआ है तो menopause के बाद हृदय रोग के जोखिम को यह कई गुना बढ़ा देता है। शोध बताते हैं कि जो महिलाएं कम एस्ट्रोजन की वजह से माहवारी बंद कर देती हैं, उनकी रक्त वाहिकाओं में डिस्फंक्शन हो जाता है। ऐसे में उम्मीद है आप समझ रहे होंगे कि पीरियड कम आने के नुकसान क्या क्या हो सकते हैं।


पीरियड में ब्लड कम आने के कारण (What are the reasons for less period)

आपने ऊपर जाना कि पीरियड कम आने के नुकसान क्या हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि पीरियड कम आता ही क्यों है? पीरियड में कम ब्लीडिंग होना क्यों होता है? पीरियड में ब्लड कम आने के कारण क्या हैं? आइए सभी कारणों पर ध्यान देते हैं।


1. चिंता कम पीरियड आने का प्रमुख कारण (Anxiety)


अगर आपका पीरियड इरेगुलर है या पीरियड के दौरान कम खून आता है तो इसका एक प्रमुख कारण चिंता हो सकता है। जब भी आप तनावग्रस्त होती हैं तो आपका शरीर ज्यादा से ज्यादा Cortisol का उत्पादन करता है जोकि एक स्ट्रेस हार्मोन है। यह हार्मोन न सिर्फ आपके पूरे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है बल्कि आपके पीरियड को भी प्रभावित करता है।

Cortisol मुख्य रूप से शरीर द्वारा उत्पादन किए जाने वाले अन्य सभी हार्मोन्स के प्रोडक्शन में टांग अड़ा देता है यानि पीरियड के लिए जिम्मेदार Estrogen और Progesterone के उत्पादन को भी प्रभावित करता है। इससे पीरियड न आना या पीरियड में कम खून आना शुरू हो जाता है। 


2. वजन भी पीरियड में कम खून आने का कारण (Weight)

एक सामान्य वजन पीरियड को रेग्यूलेट करता है जिससे सामान्य पीरियड लाने में मदद मिलती है। लेकिन अगर आप overweight या underweight हैं तो पीरियड कम आना, रुक रुककर आना या पीरियड में कम ब्लीडिंग होना जैसी शिकायतें होती रहेंगी। अगर आपका वजन सामान्य से कम है तो आपके शरीर में उचित मात्रा में फैट यानि वसा मौजूद नहीं होगी ताकि माहवारी या पीरियड्स के लिए हार्मोन्स का उत्पादन किया जा सके।

तो वहीं अगर आपका वजन सामान्य से ज्यादा है तो हो सकता है कि आपके शरीर में एस्ट्रोजन जोकि एक फीमेल सेक्स हार्मोन है, का स्तर काफी ज्यादा है। एस्ट्रोजन का बढ़ा हुआ स्तर भी पीरियड के चक्र को प्रभावित कर सकता है और पीरियड में कम खून आने का कारण बन सकता है।


3. अत्यधिक एक्सरसाइज पीरियड में कम खून आने की वजह (Reasons for less blood loss during excessive exercise period)

अगर आप जिम जाती हैं या अत्यधिक थकाने वाली एक्सरसाइज करती हैं तो उस परिस्थिति में भी पीरियड में खून कम आने की समस्या शुरू हो सकती है। जब आप एक्सरसाइज करती हैं तो शरीर में कई बार hormonal changes होते हैं और कई बार यह असंतुलित भी हो जाता है। इससे पीरियड रुक रुक कर आना, पीरियड के दौरान कम ब्लीडिंग होना जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

साथ ही, एक्सरसाइज करना तेजी से वजन को घटाने का एक जरिया भी है। जहां एक तरफ एक्सरसाइज की मदद से आप अपने वजन को घटाती हैं तो वहीं अचानक से घटे हुए वजन की वजह से पीरियड में ब्लीडिंग कम आने की दिक्कत भी शुरू हो जाती है। इसकी जानकारी हमने आपको ऊपर ही दी है। 


4. PCOS की वजह से पीरियड में ब्लीडिंग कम होती है (PCOS can cause less bleeding during periods)

PCOS यानि Polycystic ovary syndrome एक हार्मोनल डिसऑर्डर है जिसकी वजह से भी आप पीरियड में खून कम आना अनुभव कर सकती हैं। पीसीओएस के कारण अंडाशय में सिस्ट बन सकते हैं, जिससे वे बड़े हो सकते हैं। कुछ मामलों में, पीसीओएस वाली लड़कियां/महिलाएं हर महीने ओव्यूलेट नहीं कर पाती हैं या अंडा रिलीज नहीं कर पाती हैं।

ऐसा न होने की वजह से या तो पीरियड ही मिस हो जाता है या फिर पीरियड के दौरान light bleeding होती है। ऐसे में अगर आपको पीसीओडी/पीसीओएस की समस्या है तो आपको डॉक्टर की सलाह के पश्चात उपचार कराने की जरूरत पड़ सकती है।


5. Birth Control की वजह से पीरियड में खून कम आना (Birth control methods)

अगर आप प्रेगनेंसी से बचने के लिए Birth Control का इस्तेमाल करती हैं तो ये पीरियड में खून कम आने का कारण बन सकते हैं। Birth Control के कई रूप ओव्यूलेशन को रोकने के लिए प्रोजेस्टिन या एस्ट्रोजन हार्मोन का उपयोग करते हैं। इनकी वजह से शरीर में हार्मोन्स का स्तर बढ़ने या घटने लगता है जोकि पीरियड के दौरान कम ब्लीडिंग होने का कारण बन सकती हैं। 

हार्मोनल गर्भनिरोधक अंडाशय को एस्ट्रोजन का अधिक उत्पादन करने से रोकते हैं, जो एंडोमेट्रियल ऊतक के विकास को धीमा कर देता है। इससे पीरियड आने की प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ साथ पीरियड के दौरान खून का कम आने की समस्या शुरू हो सकती है।


क्या पीरियड में खून कम आना चिंता का विषय है 

क्या पीरियड में खून कम आना या पीरियड में कम ब्लीडिंग होना चिंता का विषय है? क्या ऐसा होने पर आपको घबराना चाहिए? क्या पीरियड कम आने के नुकसान को ध्यान में रखते हुए आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए? क्या इस स्तिथि में उपचार जरूरी हो जाता है? यह प्रश्न आपके मन में भी अवश्य ही कौंध रहे होंगे। तो आइए इसका उत्तर जानते हैं।

पीरियड में सामान्य से कम खून आना भी सामान्य है और आमतौर पर आपको घबराने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है। औसतन, अधिकतर महिलाएं एक मासिक धर्म के दौरान 30 से 40 मिलीलीटर रक्त खो देती हैं, जो लगभग तीन से चार बड़े चम्मच के बराबर होता है। जबकि Light bleeding या खून कम आना इस परिस्थिति को कहा जाता है जब ब्लीडिंग 5 मिलीलीटर से भी कम हो। यह हम नहीं बल्कि The International Federation of Gynecology and Obstetrics कहता है।


तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है जब:

  • ‌माहवारी आने के कुछ ही सालों में कम ब्लीडिंग शुरू हो
  • ‌Menopause के पहले ब्लीडिंग कम हो
  • ‌तनाव एक वजह हो
  • ‌वजन में आए अचानक से बदलाव की वजह से खून कम आ रहा हो
  • ‌आप संतुलित आहार न ले रहे हों
  • ‌आप अत्यधिक एक्सरसाइज कर रहे हों

आपको चिंता करने की जरूरत है जब: 

  • ‌अगर लगातार आपके पीरियड में ब्लीडिंग कम हो रही हो
  • ‌दर्द, अत्यधिक थकान, बुखार, असामान्य स्राव, या अचानक से वजन में परिवर्तन के साथ पीरियड कम आ रहा हो
  • ‌आप इस स्तिथि को लेकर चिंतित हो

Spotting और Light Period के अंतर को समझना भी जरूरी 

अक्सर लड़कियां/महिलाएं Spotting को भी पीरियड में खून कम आने की स्तिथि से जोड़कर देखती हैं, जबकि ये दोनों ही परिस्तिथियां अलग अलग हैं। इसलिए जरुरी है कि आप Light Period और Spotting के बीच के अंतर को समझें ताकि सही निर्णय ले सकें।

पीरियड भले ही कितना ही कम क्यों न हो, वह इतना अवश्य ही होगा कि आपको पैड्स या टैंपोंन की आवश्यकता पड़ जाए। यानि lighter periods में भी आपको पैड की आवश्यकता तो पड़ने ही वाली है जबकि spotting में ब्लीडिंग न के बराबर होती है। इसमें खून की कुछेक बूंदें ही आपको दिखाई देंगी और आमतौर पर इसके लिए पैड्स लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। 

इसके अलावा, पीरियड्स चाहे कितने ही हल्के क्यों न हों, 3 से 5 दिन या अधिकतम 7 दिन तक चलेंगे ही। तो वहीं दूसरी तरफ स्पॉटिंग आमतौर पर काफी कम दिनों के लिए ही होती है। यह सिर्फ कुछ घंटों के लिए भी हो सकती है। साथ ही अगर यह स्पॉटिंग है तो इसका रंग गुलाबी या भूरा होगा। परंतु अगर यह पीरियड है तो खून का रंग गाढ़ा लाल होगा। 

अंत में पीरियड आने का कारण होता है मासिक धर्म चक्र के दौरान गर्भाशय की परत का निकलना। यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें आपको पेट दर्द, पेट में मरोड़े, मूड स्विंग्स से भी जूझना पड़ेगा तो वहीं spotting कई बार गर्भवती होने का संकेत देती है। अगर आप गर्भवती हैं तो Spotting शुरुआती लक्षण हो सकता है। इसके अलावा इसमें कोई भी दर्द का अनुभव भी नहीं होता है। 


पीरियड खुलकर आने के उपाय 

अब आता है सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न कि अगर आप पीरियड में कम ब्लीडिंग होना (period me blood kam aana) की समस्या से परेशान हैं तो इसका इलाज कैसे किया जाए? क्या पीरियड खुलकर आने के उपाय घरेलू नुस्खे से किया जा सकता है? इसका उत्तर है हां। हालांकि जब यह समस्या बार बार आपको हो रही हो और शरीर में कई परिवर्तन आ रहे हों तो डॉक्टर की परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है। कई बार पीरियड में खून कम आना किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

लेकिन कुछ परिस्थितियों में घरेलू नुस्खे की मदद से भी आप पीरियड को खुलकर लाने में मदद कर सकती हैं। आइए जानते हैं कि पीरियड खुलकर आने के उपाय क्या हैं।


1. गरम दूध और हल्दी का करें सेवन (Consume hot milk and turmeric)

गरम दूध और हल्दी को एक साथ मिलाकर रोजाना सेवन करने से पीरियड खुलकर आ सकता है। इसका सेवन आपको निर्धारित पीरियड की तारीख से एक सप्ताह पहले ही शुरू कर देना चाहिए। हल्दी वाला दूध अंडाशय में एस्ट्रोजन उत्पादन को बढ़ाकर हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। ऐसे में अगर आपके हार्मोन का स्तर नियंत्रित है तो पीरियड में ब्लीडिंग भी सामान्य रूप से ही होगी।


2. कम ब्लीडिंग से परेशान महिलाएं खाएं गाजर (Carrot helps)

गाजर खाना भी पीरियड्स को खुलकर लाने का एक प्रभावी उपाय है। शायद आपको पता ही होगा कि गाजर में कैरोटिन की मात्रा प्रचुर होती है। यह आपके शरीर में एस्ट्रोजन के लेवल को बढ़ाता है जिससे पीरियड्स खुलकर आते हैं और सामान्य रूप से ब्लीडिंग होती है।


3. अदरक का सेवन भी फायदेमंद है (Consumption of Ginger)

कच्चे अदरक का नियमित सेवन आपके पीरियड्स को नियमित करने में मदद कर सकता है। अदरक में जिंजरोल होता है जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकोड़ने में मदद करता है और हार्मोनल इंबैलेंस की स्तिथि को सुधरता है। इससे पीरियड समय पर आता है और पीरियड के दौरान ब्लीडिंग की मात्रा भी सामान्य होती है।


4. मेथी और मेथी पानी का सेवन फायदेमंद (Fenugreek to increase blood flow during periods)

मेथी और मेथी का पानी भी पीरियड में खून की मात्रा को बढ़ाने में मदद कर सकता है। अगर आप irregular periods या पीरियड के दौरान light bleeding की समस्या से परेशान हैं तो रात में एक चम्मच मेथी को साफ पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह खाली पेट मेथी को पानी के साथ सेवन करें। वे आइसोफ्लेवोन्स से भरपूर होते हैं, जो एस्ट्रोजन के स्तर को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। बढ़ा हुआ एस्ट्रोजन स्तर पीरियड के दौरान ब्लीडिंग की मात्रा को संतुलित करने में मदद करता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

पीरियड कम आने के नुकसान कई हैं। जैसे कि इसकी वजह से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से आ सकते हैं, वजन अनियंत्रित हो सकता है, मानसिक स्वास्थ्य नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है आदि। पीरियड में कम ब्लीडिंग होना कई कारणों से हो सकता है जैसे अत्यधिक एक्सरसाइज, संतुलित आहार का न लेना, बर्थ कंट्रोल उपायों का इस्तेमाल करना आदि।

ऐसे में पीरियड खुलकर आने के उपाय कई हैं। इसके लिए आप पीरियड आने से एक सप्ताह पहले से ही रोजाना एक गिलास गर्म दूध के साथ हल्दी मिलाकर पी सकते हैं। साथ ही मेथी पानी पीना, अदरक खाना और गाजर का सेवन भी पीरियड में ब्लीडिंग को रेगूलेट कर सकता है। ध्यान दीजिए कि अगर आपको स्पॉटिंग की दिक्कत है तो ये खाद्य पदार्थ कोई मदद नहीं करेंगे, आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह प्रेगनेंसी का शुरुआती लक्षण हो सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Question)

1. पीरियड कम आने के नुकसान क्या हैं?

पीरियड कम आने के कई नुकसान हो सकते हैं। पीरियड के दौरान कम ब्लीडिंग की वजह से शरीर में हार्मोनल इंबैलेंस हो सकता है, हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, अचानक से वजन बढ़ सकता है, मूड स्विंग हो सकते हैं, मानसिक स्वास्थ्य नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है आदि।

 

2. पीरियड रुक रुक के आना क्या कारण है?

पीरियड रुक रुककर आना कुछ दवाओं, बहुत अधिक व्यायाम करने, शरीर का वजन बहुत कम या अधिक होने या पर्याप्त कैलोरी न खाने के कारण हो सकता है। हार्मोन असंतुलन के कारण भी पीरियड रुक रुककर आ सकता है।


3. पीरियड कम आने का कारण क्या होता है?

पीरियड कम आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे संतुलित भोजन का सेवन न करना, मदिरापान और धूम्रपान, वजन का बढ़ना या अचानक से घटना, खराब जीवनशैली, बर्थ कंट्रोल तरीकों का इस्तेमाल करना आदि।


4. पीरियड खुलकर आने के लिए क्या करना चाहिए?

पीरियड खुलकर आने के लिए आपको रोजाना योग और व्यायाम करना चाहिए लेकिन संयमित रूप से। साथ ही संतुलित आहार का सेवन करें, अच्छी नींद लें और स्ट्रेस से दूर रहें। अगर पीरियड खुलकर नहीं आ रहा है तो घरेलू उपायों में हल्दी दूध, मेथी और गाजर का सेवन लाभदायक हो सकता है।


5. नॉर्मल पीरियड कितने दिन तक रहता है?

नॉर्मल पीरियड आमतौर पर 2 से 7 दिनों तक चलता है। इस दौरान आप 20 मिलीलीटर से लेकर 90 मिलीलीटर तक खून को सकती हैं जोकि सामान्य है। अगर 5 मिलीलीटर से भी कम रक्तस्राव पीरियड के दौरान हो रहा है तो इसे लाइट पीरियड कहा जा सकता है।


References

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Dr. Shailendra Chaubey, BAMS

Ayurveda Practioner

A modern-day Vaidya with 11 years of experience. He is the founder of Dr. Shailendra Healing School that helps patients recover from chronic conditions through the Ayurvedic way of life.

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