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जानिए अर्जुन की छाल के सेवन के साइड इफेक्ट्स


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 अर्जुन की छाल जिसे Terminalia Arjuna भी कहा जाता है, एक प्रकार का पौधा है जिसका इस्तेमाल खासतौर पर आयुर्वेद में दिल संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इसकी तीन अलग अलग प्रजातियाँ होती हैं: Terminalia Arjuna, Terminalia Bellirica और Terminalia Chebula और ये तीनों ही प्रजातियां आयुर्वेद की दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है। 

हालांकि इन तीनों ही प्रजातियों के अलग अलग भाग विभिन्न बीमारियों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। जहां टर्मिनालिया अर्जुन की छाल का इस्तेमाल होता है तो वहीं टर्मिनालिया बेलिरिका और चेबुला के फल का इस्तेमाल होता है। इन तीनों के शरीर को कई चौंकाने वाले फायदे होते हैं और सदियों से इनका इस्तेमाल विभिन्न रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता रहा है।

इस ब्लॉग में हम आपको इसी विषय पर विस्तारपूर्वक जानकारी देंगे। अर्जुन छाल के फायदे व नुकसान, साइड इफेक्ट्स, इसके इस्तेमाल की सही विधि, संबंधित प्रश्न आदि सभी विषयों को कवर किया जाएगा ताकि आपको संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके।

अर्जुन की छाल क्या है ? (Arjun Ki Chhal Kya Hai)

अर्जुन की छाल या Terminalia Arjuna एक औषधीय पौधा है जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद में दिल संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। साथ ही इसका इस्तेमाल क्षय रोग, टीबी, कान दर्द, सूजन और बुखार आदि को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। इसका संस्कृत में अर्थ सफेद और स्वच्छ होता है।

आयुर्वेद की दवाइयों के साथ ही इसका इस्तेमाल आधुनिक दवाओं और उत्पादों में भी किया जाता है। हृदय स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स, आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन, हर्बल चाय, कैप्सूल और टैबलेट और कॉस्मेटिक उत्पादों में अर्जुन के पेड़ के विभिन्न भाग इस्तेमाल में लाए जाते हैं। यह एक पारंपरिक औषधि है लेकिन इसके फायदों को देखते हुए लगातार इसपर शोध चल रहा है ताकि आधुनिक दवाओं और उत्पादों में इसका इस्तेमाल बड़ी मात्रा में किया जा सके।

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अर्जुन की छाल के फायदे (Arjun Ke Fayde)

आपने देखा कि आयुर्वेद में अर्जुन पेड़ के बारे में क्या कुछ लिखा है और इसके फायदे क्या बताए गए हैं। हमने श्लोकों के आधार पर उसके फायदों को गिनाया। अब चलिए सविस्तार सभी अर्जुन की छाल के फायदे को समझते हैं और जानते हैं कि इसका सेवन आप किस प्रकार करके भरपूर फायदा प्राप्त कर सकते हैं।

 

१. हृदयरोग नाशक (Prevents heart diseases)

दिल के रोगों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए अर्जुन की छाल फायदेमंद हो सकती है। ये दिल की धमनियों को मजबूती देता है और रक्त चाप को भी नियंत्रित करता है। इसमें पाए जाने वाले Tannins और Glycosides धमनियों को चौड़ा करने और रक्त प्रवाह बनाए रखने में सहायक होते हैं। इसे दिल को सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलने में मदद मिलती है।

इसके साथ ही, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को मुक्त कड़ों (free radicals) से भी बचाता है। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके दिल को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

 

२. रक्तचाप नियंत्रण  (Controls blood pressure)

अर्जुन की छाल में मौजूद कुछ गुण रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। इससे हृदय का रक्तसंचार सुधारता है और इस प्रकार रक्तचाप संतुलित होता है। 

अगर आप इसका इस्तेमाल अपने रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए करना चाहते हैं तो इसके विकर्षण से तैयार किए गए चूर्ण या रसायन को इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इसके पहले आपको किसी आयुर्वेदिक वैद्य से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

 

३. पाचनतंत्र को बेहतर करता है (Improves digestive system)

अर्जुन की छाल का इस्तेमाल पाचन तंत्र के सुधारने में भी किया जाता रहा है। यह पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं को दूर करने और अच्छी पाचन क्रिया में मदद करता है। अर्जुन की छाल में मौजूद अम्ल गुण (Acidic Properties) वायु और कफ दोष को कम करके पाचन को सुधारते हैं। 

साथ ही इसका उपयोग ग्रहणी रोग (Irritable Bowel Syndrome) जैसे पाचन संबंधित समस्याओं में भी किया जाता है। इसमें मौजूद Tanins और Glycosides ग्रहणी रोग के उपचार में सहायक हो सकते हैं। साथ ही इसमें मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पेट में सूजन को भी कम करता है जिससे पाचन तंत्र बेहतर बनता है।

 

४. मूत्र मार्ग के स्वास्थ्य को बेहतर करता है  (Improves urinary tract health)

अर्जुन की छाल का सेवन मूत्र मार्ग के स्वास्थ्य को सुधारने में भी सहायक हो सकता है। इसमें मौजूद anti inflammatory गुण मूत्र मार्ग में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही, इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीवायरल और एंटी बैक्टिरियल गुण भी मौजूद होते हैं जिससे मूत्र मार्ग के संक्रमण को रोका जा सकता है। 

यह पित्त दोष को शांत करने में भी सहायक होता है। कई बार ऐसा होता है कि मूत्र मार्ग से संबंधित समस्या पित्त दोष के कारण होती है, ऐसे में इसकी छाल सुधार करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

 

५. कैंसर से लड़ने में सहायक ( Helpful in fighting cancer)

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में भी इसकी छाल सहायक हो सकती है क्योंकि इसमें कुछ ऐसे गुण मौजूद होते हैं जो कैंसर से लड़ सकते हैं। जैसे कि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स गुण कैंसर के गठन को रोकने में मददगार हो सकते हैं। इसके साथ ही, यह शरीर के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है ताकि शरीर कैंसर सेल्स के खिलाफ प्रभावी रूप से लड़ सके।

कैंसर के इलाज में रक्त शुद्धि की जाती है और इस प्रक्रिया में भी अर्जन की छाल महत्वपूर्ण हो सकती है। यह रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है और साथ ही इसमें मौजूद Anti Inflammatory Properties कैंसर के इन्फ्लेमेशन को कम करके पूरे शरीर को सपोर्ट प्रदान करते हैं।

 

६. मधुमेह में अर्जुन की छाल के फायदे (Benefits of Arjuna bark in diabetes)

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया, अर्जुन की छाल के कंपाउंड जैसे Tannins और Glycosides डायबिटीज के रोगियों में ब्लड शुगर लीगल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इससे इन्सुलिन सेंसिटिविटी भी इंप्रूव होती है। मधुमेह के रोगियों को कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य को सुधारने में भी मददगार साबित हो सकता है। 

इसमें पाए जाने वाले कंपाउंड हृदय के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी नियंत्रित किया जा सकता है। इससे Lipid Profile में सुधार होता है जो डायबिटीज के रोगियों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

७. आर्थराइटिस के उपचार में सहायक (Helpful in treating arthritis)

आर्थराइटिस घुटनों की बीमारी है जिसमें घुटने में अकड़न और दर्द होता है और एक समय बाद इंसान चलने फिरने में नाकाम हो जाता है। इस परिस्थिति में अर्जुन की छाल आर्थराइटिस की समस्या जैसे सूजन संबंधी ज्वाइंट की दिक्कत को दूर कर सकता है। दरअसल इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं जो घुटनों में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। 

साथ ही, आर्थराइटिस के दौरान होने वाले दर्द से भी अर्जुन की छाल मुक्ति दिला सकता है। इसमें पाए जाने वाले कंपाउड्स खासकर कि Tannins दर्द को कम करके व्यक्ति को आराम पहुंचाते हैं। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स गुण मुक्त कणों (free radicals) के नुकसान से भी शरीर को बचाता है जिससे आर्थराइटिस की समस्या गंभीर होने से पहले रुक जाती है।

 

८. अल्जाइमर के रोग को ठीक करता है (Cures alzheimer's disease)

अल्जाइमर एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जिसमें दिमाग के कुछ हिस्से सुचारू ढंग से काम करना बंद कर देते हैं जिससे स्मृति, व्यावसायिक क्षमता और रोजमर्रा की कार्यशिलता बुरी तरह प्रभावित होती है। ऐसे में अर्जुन की छाल आपकी मदद कर सकती है हालांकि ज्यादा शोध करने की आवश्यक है।

दरअसल कुछ शोधों में यह पाया गया है कि इसकी छाल में न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण मौजूद होते हैं जिसकी वजह से ये मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा करने में मदद करते हैं। साथ ही, उम्र के साथ भी संज्ञानात्मक गिरावट होती है यानि जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, व्यक्ति के सोचने समझने की क्षमता भी कम होती जाती है। ऐसे में अर्जुन की छाल इस गिरावट को कम करने में मदद कर सकता है।

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९. अस्थमा के लक्षणों में सुधार करता है  (Improves asthma symptoms)

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें सांस की नली सूज जाती है और उनमें संकुचन भी आ जाता है। इस वजह से व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ जाता है और साथ ही खांसी और सीने में जकड़न जैसी दिक्कतें भी महसूस होने लगती हैं। ऐसे में अर्जुन की छाल की मदद से इसका इलाज कुछ हद तक संभव है। 

ऐसा इसलिए क्योंकि यह एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसमें एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी एलर्जिक और म्यूकोलिटिक गुण मौजूद होते हैं। ये गुण अस्थमा के लक्षणों को कम कर सकते हैं। इसमें मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण अस्थमा में सांस की नली मे होने वाले सूजन को कम करते हैं। अस्थमा में कई बार सांस की नली में बलगम जमा हो जाता है, ऐसे में इसमें मौजूद म्यूकोलिटिक गुण बलगम को नष्ट करने और उसे बाहर निकालने में मदद करते हैं।

 

१०. त्वचा के संक्रमण में अर्जुन की छाल सहायक (Arjuna chhal helpful in skin infections)

सदियों से अर्जुन की छाल का इस्तेमाल ढेरों प्रकार के त्वचा संक्रमण को दूर करने के लिए किया जाता रहा है। अक्सर विभिन्न कारणों से हम दाद, खुजली और फंगल इन्फेक्शन आदि से जूझते हैं। ऐसे में इसमें मौजूद एंटी फंगल गुण हमें दाद, खाज, खुजली से राहत पहुंचाता है। 

यह सूजन को कम करने के साथ ही बैक्टीरिया और कवक को मारने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल भी बड़ा सरल है। आपको सबसे पहले अर्जुन की छाल को पानी में उबालना है, कम से कम 15 मिनट तक। इसके बाद इसे छान लीजिए और फिर इसका इस्तेमाल प्रभावित क्षेत्रों पर दिन में दो बार कीजिए, परिणाम आपके समक्ष होगा।

 

११. घाव को भरता है (Aids in wound healing)

अगर आपको घाव हो गया है और आप उसे प्राकृतिक तरीकों से भरना चाहते हैं तो इसकी मदद ले सकते हैं। सबसे पहले अर्जुन की छाल ले लें और उसे कूटकर उसका पाउडर बना लें। इसके पश्चात उसमें 2 चम्मच शहद या जैतून का तेल मिला दें। इस मिश्रण को अगर आप दिन में दो बार प्रभावित क्षेत्र पर लगाते हैं तो आपका घाव जल्द ही भर जायेगा।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसमें एंटी फंगल और एंटी बैक्टिरियल गुण मौजूद होते हैं। इसलिए यह घाव में फंगल संक्रमण के विकास को रोकता है और साथ ही घाव में बैक्टीरिया को भी कम करता है। इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है।

 

१२. सूजन को कम करता है (Reduces inflammation)

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया, इसकी छाल में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं। यह गुण शरीर में होने वाले सूजन को कम करने में मददगार साबित होते हैं। अगर आप इसका काढ़ा या चाय बनाकर पीते हैं तो सूजन कम होगा। हालांकि इसका सही इस्तेमाल आपको पता होना चाहिए।

अगर आपको सूजन को कम करना है तो अर्जुन के जड़ की छाल का चूर्ण बना लें और साथ ही इसमें गंगरें की जड़ की छाल का चूर्ण भी मिला लें। अब आपको इन दोनों के मिश्रित चूर्ण की 2 ग्राम मात्रा को दूध में मिलाकर पीना है। इससे दर्द और सूजन दोनों में आपको राहत मिलेगी। 

 

१३. बालों को स्वस्थ और मजबूत बनाए (keep hair healthy and strong)

अर्जुन की छाल के आयुर्वेदिक गुण बालों और स्कैल्प के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। अगर आप इस छाल का इस्तेमाल करते हैं तो यह स्कैल्प यानि सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है। इससे बाल झड़ने में भी कमी आती है। इसके साथ ही इसमें मौजूद एंटी माइक्रोबियल गुण रूसी को और सिर की त्वचा में होने वाले इन्फेक्शन को भी दूर करता है। 

इसकी छाल को पाउडर में पीस कर, इसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर एक पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को आप अपने स्कैल्प पर अप्लाई करें और लगभग 30 से 40 मिनट तक यूंही रहने दें। फिर हल्का गरम पानी से धो लें। इसके अलावा, आप चाहें तो अर्जुन की छाल के साथ ही अन्य कई पोषक तत्वों से भरपूर हमारे Hair Care Products भी ऑनलाइन खरीद सकते हैं जिसका रिजल्ट काफी अच्छा रहा है। आप चाहें तो पहले Traya Hair Test भी दे सकते हैं।

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अर्जुन की छाल से बने घरेलू दवाएं (Home Remedies using Arjuna bark)

अगर आप ऊपर दिए गए सभी लाभों को प्राप्त करना चाहते हैं तो सबसे पहले घर पर ही अर्जुन की छाल से कुछ घरेलू दवाएं बना लें और जरूरत पड़ने पर इनका सेवन करें। इसकी मदद से आप काढ़ा, चूर्ण और मलहम तैयार कर सकते हैं जो विभिन्न परेशानियों में आपकी मदद करेगा। 

 

१. अर्जुन की छाल से काढ़ा बनाएं (decoction from Arjun bark)

अर्जुन की छाल से आप बड़े ही आसानी से काढ़ा बना सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले 1 बड़े चम्मच अर्जुन की छाल को 1 कप पानी में डालें। इसके बाद उसे अच्छे से उबाल लें और कम से कम 10 मिनट तक पकाएं। 

तत्पश्चात, इसे छान कर आप इसका दिन में 2 बार सेवन कर सकते हैं। इससे हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अस्थमा जैसी बीमारियों में लाभ मिल सकता है।

 

२. अर्जुन की छाल का चूर्ण बनाएं (Arjuna Bark Powder)

दूसरा तरीका यह है कि आप इसका चूर्ण बना लें और दूध के साथ इसका सेवन करें। इसके सेवन से आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट मिलेगा और आपका पूरा स्वास्थ्य बेहतर बनेगा। विधि आसान है। सबसे पहले इसकी छाल को सुखा लें।

इसके बाद, इसे पीसकर चूर्ण बना लें। ध्यान रखें कि इसे हमेशा एयरटाइट कंटेनर में ही रखें। इससे यह लंबे समय तक सुरक्षित भी रहेगा और आप इसका सेवन दूध के साथ कर सकते हैं।

 

३. अर्जुन की छाल का मलहम बनाएं (ointment from Arjuna bark)

अगर आपको त्वचा संबंधित दिक्कतें जैसे दाद, खुजली, फंगल इन्फेक्शन आदि है तो आप इसकी छाल से मलहम बना सकते हैं। इसका मलहम बनाना भी काफी आसान है। बस आपको सबसे पहले 1 चम्मच अर्जुन की छाल का पाउडर ले लेना है।

इसके बाद इसे 2 चम्मच शहद या जैतून के तेल में मिल दें। बस हो गया आपका मलहम तैयार। इसे आप प्रभावित स्थान पर लगा कर फायदे प्राप्त कर सकते हैं। 

 

अर्जुन की छाल के साइड इफेक्ट्स (Arjun chal side effects in Hindi)

अर्जुन की छाल के साइड इफेक्ट्स

जहां एक तरह अर्जुन की छाल के ढेरों फायदे हैं तो इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी आपको देखने को मिल सकते हैं। इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि इसका सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक वैद्य से अवश्य संपर्क करें। इसके जोखिम कम करने के लिए आप शुरुआत में इसका कम मात्रा में सेवन शुरू करें और धीरे धीरे मात्रा बढ़ा सकते हैं।

अर्जुन की छाल के निम्नलिखित साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं:

  • ‌पेट में दर्द
  • ‌दस्त
  • सिरदर्द
  • ‌हाइपोटेंशन
  • मतली
  • ‌रक्तस्राव 

अर्जुन की छाल में मौजूद टैनिन जहां कई फायदे पहुंचाता है तो कुछ व्यक्तियों में यह पेट दर्द का कारण भी बन सकता है। इसके अलावा, यही दस्त का कारण भी बन सकता है। यहां गौर करने वाली बात है कि अर्जुन की छाल एक सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है लेकिन कुछ लोगों में इसके दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

 

अर्जुन छाल में प्रमुख पोषक तत्व और यौगिक (Nutrients of Arjuna Bark)

अर्जुन की छाल में ढेरों पोषक तत्व मौजूद होते हैं और इनके कई फायदे होते हैं। अर्जुन छाल के फायदे को विस्तारपूर्वक बताने से पहले जरूरी है कि आप इसमें मौजूद प्रमुख पोषक तत्वों और यौगिकों की पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। नीचे दिए टेबल में आप इसमें मौजूद सभी पोषक तत्वों की जानकारी देख सकते हैं।

 

पोषण तत्व/यौगिक

संभावित लाभ

ट्राइटरपेनॉयड्स

शांति-प्रद गुण; एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण।

फ्लैवोनॉयड्स

एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव; कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकते हैं।

सैपोनिन्स

हृदय सुरक्षा प्रभाव; संभावित कोलेस्ट्रॉल कम करने के गुण।

ग्लाइकोसाइड्स (अर्जुनेटिन)

एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभाव; हृदय स्वास्थ्य में योगदान कर सकते हैं।

कोएंजाइम क्यू10

कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पन्न करने में समर्थ; एंटीऑक्सीडेंट गुण।

कैल्शियम

हड्डी स्वास्थ्य का समर्थन करता है।

मैग्नीशियम

विभिन्न बायोकेमिकल प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक; पेशी और तंतु कार्य का समर्थन करता है।

जिंक

संवर्धन कार्य और घाव भराई के लिए आवश्यक; प्रतिरोध क्रिया का समर्थन करता है।

कॉपर

लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करने के लिए योगदान करता है; एंटीऑक्सीडेंट गुण।

पोटैशियम

इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण; ह्रदय स्वास्थ्य  का समर्थन करता है।

आयरन

हीमोग्लोबिन और ऑक्सीजन का निर्माण के लिए आवश्यक।

विटामिन सी

एंटीऑक्सीडेंट गुण; प्रतिरोध क्रिया का समर्थन करता है।

विटामिन ई

एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव; कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है।

 

तो आपने देखा कि किस प्रकार अर्जुन की छाल में मौजूद विभिन्न पोषक तत्व और यौगिक शरीर को किस प्रकार से फायदे पहुंचाते हैं। हम आगे विस्तार से इन सभी फायदों पर बात करेंगे और साथ ही इससे होने वाले संभावित नुकसान और साइड इफेक्ट्स की भी जानकारी देंगे।

 

आयुर्वेद में अर्जुन की छाल का महत्व (Importance of Arjuna bark in Ayurveda)

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया, अर्जुन की छाल का इस्तेमाल सदियों से आयुर्वेद की दवाओं में होता आ रहा है। हृदय स्वास्थ्य से लेकर पाचन शक्ति को बेहतर करने तक, लगभग सभी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में इसका उपयोग किया जाता रहा है। आयुर्वेद में हम देखें तो, अर्जुन पारंपरिक रूप से हृदय, पित्त शामक, रसायन जैसे गुणों से जुड़ा हुआ है। 

चलिए अब संस्कृत के श्लोकों के साथ देखते हैं कि आयुर्वेद में अर्जुन की छाल के फायदे क्या बताए गए हैं। 

१. समग्र शारीरिक स्वास्थ्य (Improves overall physical health)

 

अर्जुनो मधुरो वीर्यो मधुरो रूप धारिणी।

नानारत्नसमायुक्ता सार्वभौमचिदात्मिका॥

 

इसका अर्थ है कि अर्जुन स्वाद में मधुर, महान बल वाला, मनमोहक रूप वाला, विभिन्न रत्नों से सुशोभित और पृथ्वी का सार है। हृदय स्वास्थ्य और समग्र स्वास्थ्य के लिए निर्धारित फॉर्मूलेशन में अर्जुन एक प्रमुख घटक रहा है। इसकी छाल, विशेष रूप से, अपने कार्डियोप्रोटेक्टिव गुणों के लिए जानी जाती है, जो हृदय को मजबूत बनाने और रक्तचाप को रेग्यूलेट करने में मदद करती है।

 

२. पाचन शक्ति को बेहतर करता है (Improves digestion)

 

पाचने रोगनाशाय भूतपूर्वाय शान्तिदे।

अर्जुनस्य गुणान्येतानि प्राहुः पुराणिकाः॥

 

इसका अर्थ हुआ कि अर्जुन में पाचन शक्ति बढ़ाने, रोगों को दूर करने और शांति प्रदान करने जैसे गुण हैं। यानि कुल मिलाकर आयुर्वेद के अनुसार यह पाचन शक्ति को बेहतर करने में मदद करता है। अर्जुन की छाल और इसके अन्य भागों का इस्तेमाल पाचनतंत्र के स्वास्थ्य जैसे पाचन क्रिया को बेहतर करने और गैस  को कम करने में किया जाता रहा है।

 

३. कोलेस्ट्रॉल विनियमन (Regulates cholesterol)

 

अर्जुनस्य य शीतोष्णः स्निग्धोऽतीव मधुरहः।

संग्रही रुक्ष उष्णश्च स वै अर्जुनः स्मृतः॥

 

इसका अर्थ हुआ कि अर्जुन ठंडा और गर्म, नीरस, अत्यधिक मीठा और कसैले, शुष्क और गर्म गुणों वाला माना जाता है । यानि इसके ये गुण कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और atherosclerosis को दूर करने में सहायक साबित हो सकते हैं। 

 

४. कायाकल्प और एडाप्टोजेनिक गुण (Rejuvenating and adaptogenic properties)

 

वायुप्रकोपनाशाय रसायनाय च वाजिनाम्।

अर्जुनस्य गुणा यस्य तस्य भूयः प्रचक्षते॥

 

इसका अर्थ हुआ कि अर्जुन अपने गुणों के कारण वात में असंतुलन को शांत करता है, एक कायाकल्प टॉनिक के रूप में कार्य करता है और जीवन शक्ति को बढ़ाता है। इस तरह यह शरीर को तनाव को झेलने के काबिल बनाता है और साथ ही पूरे स्वास्थ्य को बेहतर रखता है।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

 

अर्जुन की छाल के फायदे कई हैं और यह आपके शरीर को तमाम तरीकों से फायदे प्रदान करता है। गठिया, सूजन, त्वचा संबंधित रोग, मधुमेह, अस्थमा जैसी कई शारीरिक समस्याओं में यह काफी फायदेमंद होता है। हालांकि जहां इसके कई फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं।

इसकी वजह से आपको पेट दर्द और दस्त जैसे साइड इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं। इसलिए हम आपको सलाह देते हैं कि इसका इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह अवश्य लें। अगर आप किसी अन्य दवाई का सेवन कर रहे हैं तो बिल्कुल भी इसका सेवन बिना डॉक्टर के परामर्श के न करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Question)

 

१. अर्जुन की छाल किस बीमारी में काम आती है ?

अर्जुन की छाल मधुमेह, गठिया, अस्थमा, कैंसर और त्वचा संबंधित बीमारियों में काम में आती है। साथ ही यह आपके बालों और सिर की त्वचा को भी स्वास्थ्य रखने में मदद कर सकती है। 

२. अर्जुन की छाल कितने दिन पीना चाहिए?

अर्जुन की छाल का सेवन आपको अपने डॉक्टर या आयुर्वेदिक वैद्य से पूछकर करना चाहिए। आमतौर पर 2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन आपको फायदे प्रदान कर सकता है। 

३. अर्जुन की छाल के नुकसान क्या हैं ?

अर्जुन की छाल आमतौर पर एक सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि है। परंतु कुछ लोगों में इसके कुछ साइड इफेक्ट्स दिखलाई पड़ सकते हैं जैसे पेट में दर्द, दस्त, हाइपोटेंशन और रक्तस्राव। अगर आपको इसकी वजह से कोई साइड इफेक्ट दिखाई देता है तो सेवन तुरंत रोक दें।

४. क्या अर्जुन की छाल का काढ़ा खाली पेट पीना उचित है ?

अर्जुन की छाल का काढ़ा आप खाली पेट भी पी सकते हैं। लेकिन इससे पहले आपको डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। सबका शरीर अलग अलग होता है और इसलिए खाली पेट इसका काढ़ा साइड इफेक्ट्स का कारण भी बन सकता है।

५. अर्जुन की छाल की तासीर गर्म होती है या ठंडी?

अर्जुन की छाल की तासीर ठंडी होती है और यह शरीर को ठंडा करने में मदद करती है। अर्जुन की छाल की तासीर बिल्कुल गरम नहीं होती और शरीर को ठंडक पहुंचाती है।

६. अर्जुन की छाल साइड इफेक्ट्स

अगर ज्यादा मात्रा में सेवन करें तो अर्जुन की छाल साइड इफेक्ट्स भी दे सकता है जैसे ‌पेट में दर्द, ‌दस्त, सिरदर्द आदि।

References

 

अस्वीकरण: यह ब्लॉग सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है न कि किसी बीमारी के इलाज के लिए। आपको सलाह दी जाती है कि किसी भी रोग या शारीरिक समस्या के लिए सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करें।

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    Dr. Shailendra Chaubey, BAMS

    Ayurveda Practioner

    A modern-day Vaidya with 11 years of experience. He is the founder of Dr. Shailendra Healing School that helps patients recover from chronic conditions through the Ayurvedic way of life.

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    Reviewed on 31st Dec 2021

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    Month 1

    Month 4

    Month 8

    Rajat Sadh Verified review
    4.5

    Reviewed on 21st Feb 2022

    I didn't want to resort to surgery or any other invasive treatment for my hair loss and I found Traya. They have helped me grow back a full head of hair in just eight months. I'm so happy with the results, thank you so much! On complete Traya recommended plan. read more

    Month 1

    Month 4

    Month 5

    Saumya Verified review
    4.5

    Reviewed on 6th Nov 2021

    I was losing hair due to stress and other things but Traya analyzed everything perfectly and sent me a treatment plan. After such great results, my relatives have also started using Traya. Thank you, Raveena my Hair coach (you are wonderful) for such amazing help. On complete Traya recommended plan. read more

    Month 1

    Month 4

    Month 6

    Swati Verified review
    4.5

    Reviewed on 17th August 2021

    It takes time guys, but you won't regret it. My hair grew back stronger and my overall hair quality improved. Thank you Raveena, my hair coach, she really held me accountable and kept me on track. Super happy customer. On complete Traya recommended plan. read more

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    ★★★★★

    I feel much better after taking up the treatment. The treatment does not just include tablets and minoxidil.

    Treatment includes ensuring proper sleep cycle and proper diet. Surely there is notable changes after 9 months of treatment.

    TheCmayil

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    ★★★★★

    As a mother,I was extremely worried about my teenage daughter's hair condition. I chanced upon Traya and approached you.A very helpful team always making sure that a regular follow up is done.The hair health has improved a lot since I started and I am very pleased with the results. Thank you Traya..Thank you Mallika for being just a call away.

    SANJUKTA SANYAL

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    ★★★★★

    I am 25 years old. I have androgenic alopecia. couple of months back I found traya and started its medication. now I am happy with its result. most important thing is patience and consistency. diet is also a key factor. I recommend traya 100%. good customer service.the sooner the better

    jithu thomas

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    ★★★★★

    Before trying traya i had used a lot of other meditation too... Traya was the only one which gave me the best positive results for my hair... Grateful to them

    LOKJEET RANAA..

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    ★★★★★

    I have been following Traya regime since last 9 months now and the results are all to speak for. I had issues regarding hair density and patches. Now I am very much happy and satisfied with the results. In short, Quality & Quantity both have improved for me. Infact, it has been helpful for my body balance as well. Thanks to Sneha for all the help and Cheers to the Traya team👍 👍 👍

    Devarshi Desai

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    ★★★★★

    It's all about patience and consistency. Traya helped me to grow my hair back, as well as to live a healthy lifestyle with the customized diet. Before Traya I lost all my hopes. If a person like me can grow my hairs back., I'm 100℅ sure with the help of Traya everyone who is facing hair fall issues can grow back their hair. Trust me it's worth it.

    Shubham Nikam

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    ★★★★★

    TRAYA'S hairfall treatment has been of great help in reducing my hairfall issue and also regrowing new hair. Also the support staff Poornima who was assigned to me has been very helpful as she checked on my progress, provided diet plans and answering any questions regarding the medication. A great experience overall.

    rohit daz

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    ★★★★★

    TRAYA'S hairfall treatment has been of great help in reducing my hairfall issue and also regrowing new hair. Also the support staff Poornima who was assigned to me has been very helpful as she checked on my progress, provided diet plans and answering any questions regarding the medication. A great experience overall.

    rohit daz

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    ★★★★★

    Since i have started using Traya hair care regime, my hair have really improved a lot. This regime is also helping me in stress management and to get better sleep. I would highly recommend Traya.

    Bhawana Singh

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    ★★★★★

    The product is very good
    The results were visible after 15 itself
    Must try essential hair food

    Sonia Hair Studio

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    ★★★★★

    IT WORKS! I'm not someone who falls for a trap easily so I researched well before taking this treatment! My research, their treatments and efforts have truly shown results. I like their concept of 3 sciences, it was new to me but they proved it by giving me my desired results! Thanks Tatva

    Kiran Rajput

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