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जानिए कितना होना चाहिए आपके ब्लड का स्तर प्रेगनेंसी में! Pregnancy Me Hemoglobin Kitna Hona Chahiye


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हिमोग्लोबिन हमारे पूरे शरीर के कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। उम्र, लिंग या वजन चाहे जो भी हो, हीमोग्लोबिन की आवश्कता हमारे शरीर को हर वक्त रहती है क्योंकि यही रक्त को उसकी रंगत देता है और साथ ही लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। व्यक्ति, आयु और विभिन्न परिस्थितियों के हिसाब से इसकी मात्रा सबमें अलग अलग हो सकती है। लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल यह आता है कि आखिर प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए?

यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रेगनेंसी यानि गर्भावस्था सिर्फ मां के बारे में ही नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी है। दोनों के स्वास्थ्य के लिए शरीर को उचित मात्रा में पोषक तत्व मिलना चाहिए और साथ ही शरीर में भी पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन की मात्रा होनी चाहिए। लेकिन कितनी? इस प्रश्न का जवाब आप इस ब्लॉग में जानेंगे। साथ ही, हम आपको यह भी बताएंगे कि प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन का महत्व क्या है, प्रेगनेंट महिलाएं इसे बढ़ाने के लिए क्या खाएं आदि।


हिमोग्लोबिन क्या है (What is hemoglobin)

हिमोग्लोबिन एक प्रोटीन है जोकि लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है। यह प्रोटीन शरीर के सभी अंगों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों को पहुंचाने के लिए आवश्यक होता है। इसके अलावा, हिमोग्लोबिन ही कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक वापस पहुंचाने में मदद करता है। यह हिम प्रोटीन से बना होता है जोकि ऑक्सीजन को बांधने में सक्षम होता है।

हमारे रक्त का रंग लाल है, यह भी हीमोग्लोबिन की ही वजह से होता है। इस प्रोटीन में आयरन भी मौजूद होता है जोकि ऑक्सीजन के मोलेक्यूल को बांधने का कार्य करता है और शरीर के सभी हिस्सों में पहुंचाता है। इसकी कमी शरीर में होने पर बालों का झड़ना तेज हो जाता है, एनीमिया रोग हो जाता है, थकान और कमजोर की शिकायत हो जाती है आदि। 

अगर आपके बाल तेजी से झड़ रहे हैं तो आपको Hair Test देना चाहिए। यह टेस्ट इसलिए जरूरी है क्योंकि बालों के झड़ने के 20 से भी अधिक कारण होते हैं और बिना कारण जाने समाधान ढूंढने का कोई अर्थ नहीं है। यह फ्री टेस्ट आपके बाल झड़ने की समस्या का सटीक कारण पता लगाता है ताकि सही उपचार किया जा सके। यह टेस्ट देने के लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है, घर बैठे स्मार्टफोन की मदद से आप मात्र चंद मिनटों में टेस्ट को देकर फ्री रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं।


प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए (Pregnancy Me Hemoglobin Kitna Hona Chahiye)

प्रेगनेंसी की अवस्था में एक महिला के शरीर में रक्त की मात्रा लगभग 40-50% बढ़ जाती है, लेकिन लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या उतनी नहीं बढ़ती। इसलिए गर्भवती महिलाओं में हिमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। एक स्वस्थ गर्भवती महिला में पहली और तीसरी तिमाही में हिमोग्लोबिन की मात्रा 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर (जी/डीएल) या अधिक तो वहीं दूसरे तिमाही में 10.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर (जी/डीएल) या अधिक होना चाहिए।

अगर आप एक व्यस्क महिला हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं तो आमतौर पर आपके शरीर में 12.1 ग्राम/डीएल से 15.1 ग्राम/डीएल हीमोग्लोबिन की मात्रा होनी चाहिए। तो वहीं गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन की मात्रा 12 से 16 ग्राम प्रति डेसीलीटर (जी/डीएल) के बीच होनी चाहिए। 


गर्भावस्था के 6 माह के दौरान हीमोग्लोबिन स्तर (Hemoglobin level during 6 months of pregnancy)

गर्भावस्था में 6 महीने बीतने के बाद का समय काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस पड़ाव में आपके गर्भ में पल रहे बच्चे का तेजी से विकास हो रहा होता है इसलिए हीमोग्लोबिन की सही मात्रा जरूरी होती है। इसलिए गर्भावस्था के 6 माह के दौरान हीमोग्लोबिन स्तर 10.5 ग्राम प्रति डेसिलीटर से 13.8 ग्राम प्रति डेसिलीटर होना चाहिए। यह गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के लिए आवश्यक हीमोग्लोबिन की मात्रा है।

आपके प्रेगनेंट होने के 6 महीने पश्चात आपके बच्चे का तेजी से ग्रोथ होना शुरू हो जाता है। सामान्य परिस्थिति में इस अवस्था तक आपका शिशु अब लगभग 12 इंच लंबा है और उसका वजन 1 से 2 पाउंड के बीच है। साथ ही, कान पूरी तरह से विकसित गए हैं और आपका शिशु अब गर्भ के बाहर से आवाज़ सुन सकता है। आप संभवतः इस चरण में अपने बच्चे को अधिक बार लात मारते और इधर-उधर घूमते हुए महसूस करेंगी। यानि बच्चे का विकास तेज गति से हो रहा है और इसलिए हीमोग्लोबिन की आवश्यकता ज्यादा पड़ती है।


गर्भावस्था के 8 माह के दौरान हीमोग्लोबिन स्तर (Hemoglobin level during 8th month of pregnancy)

गर्भावस्था के आठवें माह तक आपका बच्चा काफी हद तक विकसित हो चुका होता है। यह समय आपके गर्भावस्था की तीसरी तिमाही का होता है। गर्भावस्था के 8 माह के दौरान हीमोग्लोबिन स्तर 10.0 ग्राम/डीएल से 13.5 ग्राम/डीएल तक होना चाहिए। इस अवस्था में दूसरी तिमाही के मुकाबले हीमोग्लोबिन की आवश्यकता थोड़ी कम हो जाती है।

गर्भावस्था के 8 महीने बीत जाने के बाद आपका शिशु अब लगभग 18 इंच लंबा है और उसका वजन लगभग 5 पाउंड है। यही वह पीरियड है जब बच्चे का वजन बढ़ता है। साथ ही, यही वह समय है जब बच्चे का दिमाग भी तेजी से विकसित हो रहा होता है और अरबों न्यूरॉन्स दिमाग में कनेक्शन बना रहे होते हैं। इस दौरान आपको थकान और सोने में कठिनाई हो सकती है जोकि आम बात है।


गर्भावस्था के 9 माह के दौरान हीमोग्लोबिन स्तर (Hemoglobin level during 9 months of pregnancy)

गर्भावस्था का नौवां महीना आपके बच्चे के जन्म का होता है। इस वक्त तक आपके बच्चे के सभी अंग सामान्य रूप से विकसित हो चुके होते हैं। गर्भावस्था के 9वें महीने (तीसरी तिमाही) में, अनुशंसित हीमोग्लोबिन स्तर आम तौर पर 9.5 और 13.0 ग्राम/डीएल के बीच होता है। यह एक सामान्य स्तर है जिससे बच्चे का जन्म बिना किसी दिक्कत के हो सके और मां का स्वास्थ्य भी बेहतर रहे।

बच्चे के जन्म के दौरान पर्याप्त हीमोग्लोबिन का स्तर महत्वपूर्ण है। प्रसव के दौरान रक्त की हानि होना तो स्वाभाविक होता है और पर्याप्त आयरन भंडार होने से आपके शरीर को प्रभावी ढंग से ठीक होने में मदद मिलती है। साथ ही, बच्चे के जन्म के पश्चात स्वाभाविक रूप से आप थकान का अनुभव करेगी जिसमें हीमोग्लोबिन का उचित स्तर ही मदद करेगा।


प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन का क्या महत्व है (Importance of hemoglobin in pregnancy)

प्रेगनेंसी यानि गर्भावस्था एक महत्वपूर्ण पीरियड होता है जिसमें मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर होना आवश्यक है। इस दौरान हीमोग्लोबिन न सिर्फ बच्चे के विकास में मदद करता है बल्कि आपको ऊर्जावान और स्फूर्तिवान बनाने के लिए भी जरूरी होता है। हीमोग्लोबिन माँ के फेफड़ों में ऑक्सीजन से जुड़ता है और इसे रक्तप्रवाह के माध्यम से गर्भाशय तक ले जाता है। वहां से, प्लेसेंटा और गर्भनाल के माध्यम से बच्चे को ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है।

इसके अलावा, बच्चे के विकास के लिए ऑक्सीजन सबसे ज्यादा जरुरी होता है। बच्चे के अंग, टिशूज और सेल्स का सही विकास हो, इसके लिए ऑक्सीजन महत्वपूर्ण है। हिमोग्लोबिन ही ऑक्सीजन की सही पूर्ति के लिए जिम्मेदार है। गर्भावस्था के दौरान मां के स्वास्थ्य को बनाए रखने में हीमोग्लोबिन भी भूमिका निभाता है। यह सुनिश्चित करता है कि उसके अंगों और ऊतकों को ठीक से काम करने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन मिले।


प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन की कमी होने के लक्षण (Symptoms of hemoglobin deficiency during pregnancy)

अगर गर्भावस्था के दौरान एक शरीर में हिमोग्लोबिन का स्तर घट जाता है तो आपको कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। तो आइए जानते हैं कि प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन की कमी होने के लक्षण क्या हैं।


1. तेजी से बालों का झड़ना 

प्रेगनेंसी के दौरान अगर हीमोग्लोबिन की कमी आपके शरीर में हो जाए तो तेजी से बाल झड़ने की समस्या खड़ी हो सकती है। हिमोग्लोबिन ही वह प्रोटीन है जो खोपड़ी सहित शरीर के हर अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाता है। ऐसे में अगर आपके शरीर में इसकी कमी हो जाए तो सिर की त्वचा तक हीमोग्लोबिन की मात्रा कम पहुंचेगी जिससे बाल कमजोर होकर टूटना शुरू हो जायेंगे।

हीमोग्लोबिन की कमी के अलावा अन्य 19 ऐसे कारण हैं जिनसे बाल झड़ना शुरू होता है। बिना सही कारण जाने आपको कभी भी बालों का इलाज नहीं करना चाहिए। इसलिए हम आपको फ्री Hair Test देने की सलाह देते हैं। 2 मिनट का यह फ्री टेस्ट घर बैठे स्मार्टफोन की मदद से दिया जा सकता है और बालों से जुड़ी किसी भी समस्या का सटीक कारण पता लगाया जा सकता है। जब सही कारण पता होगा, तो सही इलाज करने में भी मदद मिलेगी।

2. अत्यधिक थकान और कमजोरी 

प्रेगनेंसी के दौरान अगर आपके रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है तो आप अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस कर सकती हैं। प्रेग्नेसी के दौरान पहले से ही आपके शरीर में कई बदलाव आ रहे होते हैं और आपका शरीर जल्दी थकने लगता है। लेकिन हीमोग्लोबिन की कमी होने पर अत्यधिक थकान और कमजोरी का अनुभव हो सकता है।

3. त्वचा में पीलापन 

त्वचा में पीलापन भी प्रेगनेंसी के दौरान हीमोग्लोबिन की कमी का एक लक्षण है। जैसा कि आपको पहले से ही पता होगा, हमारे रक्त का रंग लाल हीमोग्लोबिन की ही वजह से होता है। ऐसे में अगर इसकी ही कमी शरीर में हो जाए तो त्वचा पीली दिखने लगती है।

4. सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होना

सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होना भी प्रेगनेंसी के दौरान हीमोग्लोबिन के कम होने का एक प्रमुख लक्षण है। प्रेगनेंसी के दौरान आपके साथ साथ बच्चे के लिए ऑक्सीजन बहुत महत्वपूर्ण होता है। जब आपको एनीमिया (हीमोग्लोबिन की काकी) होता है तो आपके शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। इससे आपको सांस लेने में तकलीफ महसूस हो सकती है, खासकर जब आप सक्रिय हों।

5. सिर दर्द और चक्कर आना 

प्रेगनेंसी के दौरान अगर आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाए तो सिर दर्द और चक्कर आने की समस्या दिखलाई पड़ सकती है। अधिकतर महिलाएं जो इस अवस्था से गुजरती हैं, उन्हें चक्कर आने की समस्या होती है। एनीमिया के कारण सिरदर्द और चक्कर इसलिए आ सकते हैं क्योंकि आपके मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है।


प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन कैसे बढ़ाएं (How to increase hemoglobin during pregnancy)

हिमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए कई तरीके हैं और कई खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन किया जा सकता है। लेकिन जब आप गर्भावस्था में होती हैं तो हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए हर पदार्थ का सेवन नहीं कर सकती। इस अवस्था में आपको बेहद ही सतर्क रहकर चुनाव करना होता है कि क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, क्या करना चाहिए आदि। तो चलिए जानते हैं कि प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन कैसे बढ़ाएं।


1. आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं 

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन अधिकाधिक करना चाहिए जिसमें आयरन की प्रचुर मात्रा मौजूद हो। इसमें भी आपको दो प्रकार के आयरन का ध्यान रखना है, पहला है heme iron और दूसरा non-heme iron । Heme iron शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाता है जिसमें शामिल है लाल मांस, पोल्ट्री, मछली खासकर कि सालमन और टूना।

दूसरे स्थान पर आता है Non-heme iron जो हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। अवशोषण बढ़ाने के लिए इन्हें विटामिन सी के साथ मिलाएं। उदाहरणों में गहरे रंग की पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, केल), दाल, बीन्स, टोफू, फोर्टिफाइड अनाज शामिल हैं।


2. विटामिन सी युक्त आहार लें

प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन बढ़ाने का दूसरा उपाय है विटामिन सी से युक्त आहार का सेवन करना। विटामिन सी विटामिन परिवार का एक महत्वपूर्ण सदस्य है जोकि गर्भावस्था के दौरान काफी फायदेमंद होता है। विटामिन सी से भरपूर फलों और सब्जियों को भरपूर मात्रा में शामिल करें क्योंकि ये आपके शरीर को आयरन को अधिक कुशलता से अवशोषित करने में मदद करते हैं। 

खट्टे फल (संतरा, अंगूर), टमाटर, शिमला मिर्च, स्ट्रॉबेरी सभी विटामिन सी के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। ये सभी आपको आसानी से बाजार में मिल भी जायेंगे जिसका उचित मात्रा में सेवन किया जा सकता है। खट्टे फलों में अधिकाधिक मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। 


3. प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें

गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके बच्चे को सामान्य रूप से बढ़ने में मदद करता है। प्रोटीन शरीर की प्रत्येक कोशिका में पाया जाता है, संरचना प्रदान करता है और कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करता है। गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 6 ग्राम अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता होती है। 

ऐसे में आपको उन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो प्रोटीन से भरपूर हों। कभी भी बिना डॉक्टर की परामर्श के गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन सप्लीमेंट्स न लें। प्रोटीन लाल रक्त कोशिकाओं के लिए एक बिल्डिंग ब्लॉक है, इसलिए अपने आहार में अंडे, दाल, नट्स और बीज जैसे प्रोटीन स्रोतों को शामिल करें।


4. रोजाना आसान एक्सरसाइज करें

प्रेगनेंसी के दौरान आप कुछ आसान और सुरक्षित एक्सरसाइज कर सकती हैं। खासतौर पर ऐसे कई योग आसन हैं जिन्हें गर्भावस्था के दौरान करके शरीर में हिमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाया जा सकता है। पैदल चलना या आसन योग जैसे हल्के व्यायाम से रक्त प्रवाह में सुधार हो सकता है और संभावित रूप से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ सकता है। 

इसके लिए आप रोजाना आधे घंटे पैदल चल सकती हैं, 10 से 15 मिनट तैर सकती हैं, नियमित एरोबिक व्यायाम कर सकती हैं। खासतौर पर मार्जरीआसन (बिल्ली मुद्रा/गाय मुद्रा) प्रेगनेंसी के दौरान सुरक्षित भी होता है और संभवतः शरीर में हिमोग्लोबिन के स्तर को भी बढ़ा सकता है।


5. लोहे के बर्तन में भोजन पकाएं

शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने के लिए आयरन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में आप आयरन की कुछ मात्रा लोहे के बर्तनों से भी प्राप्त कर सकती हैं। इसके लिए आप लोहे के बर्तनों में भोजन पका सकती हैं, खासतौर पर हरी पत्तेदार सब्जियां और साग। 

11 अध्ययनों की 2019 की समीक्षा में पाया गया कि 50% आयरन युक्त बर्तनों में हीमोग्लोबिन में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई, और 33.3% आयरन युक्त सिल्लियों में भी यही परिणाम दिखा। कच्चे लोहे में खाना पकाने से नॉनस्टिक कुकवेयर की तुलना में खाद्य पदार्थों में नॉनहेम आयरन की मात्रा 16% तक बढ़ सकती है। 


प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन अत्यधिक होने के नुकसान (Disadvantages of excessive hemoglobin during pregnancy)


प्रेगनेंसी के दौरान हीमोग्लोबिन की पर्याप्त मात्रा शरीर को चाहिए होती है। लेकिन कहते हैं न कि किसी भी चीज की अति हमेशा नुकसानदायक होती है। हिमोग्लोबिन का स्तर भी एक सीमा तक ही फायदेमंद है, लेकिन इसकी अधिकता हो जाए तो मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। 

दरअसल जब रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो रक्त भी आवश्यकता से अधिक गाढ़ा हो जाता है। रक्त के अधिक गाढ़ा होने की वजह से हृदय को उसे पंप करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इससे हृदय पर दबाव पड़ सकता है और रक्तचाप बढ़ सकता है, जिससे संभावित रूप से प्रीक्लेम्पसिया जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं। प्रीक्लेम्पसिया प्रेगनेंसी के दौरान उच्च रक्तचाप की स्तिथि को कहा जाता है।

इसके अलावा, रक्त गाढ़ा होने की वजह से पोषक तत्व और ऑक्सीजन की बच्चे तक डिलीवरी में भी बाधा पड़ सकती है। इससे भ्रूण का विकास बाधित हो सकता है या SGA (small for gestational age) शिशुओं जैसी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, उच्च हीमोग्लोबिन स्तर से रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है, जो माँ और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।


प्रेगनेंसी में ब्लड कितना पॉइंट होना चाहिए (What should be the blood point during pregnancy)

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में ब्लड यानि रक्त की आवश्यकता बढ़ जाती है। प्रेगनेंसी के अलग अलग तिमाही में रक्त की मात्रा अलग अलग होती है। रक्त की मात्रा गैर-गर्भवती मूल्यों से 45% बढ़कर लगभग 1,200 से 1,600 मिलीलीटर (एमएल) हो जाती है। खासतौर पर यह गर्भावस्था के दूसरे तिमाही में होता है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बढ़ते बच्चे को अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है और बढ़ी हुई रक्त मात्रा पूरे शरीर में इन आवश्यक चीजों को पहुंचाने में मदद करती है। साथ ही, बढ़े हुए गर्भाशय और प्लेसेंटा को ठीक से काम करने के लिए पर्याप्त रक्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है। बच्चे के जन्म लेने के पहले भी शरीर रक्त स्राव के लिए खुद को तैयार करता है, इसलिए भी रक्त की आवश्यकता बढ़ जाती है।


निष्कर्ष (Conclusion)

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा अलग अलग होनी चाहिए। एक स्वस्थ गर्भवती महिला में पहली और तीसरी तिमाही में हिमोग्लोबिन की मात्रा 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर (जी/डीएल) या अधिक तो वहीं दूसरे तिमाही में 10.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर (जी/डीएल) या अधिक होना चाहिए।

अगर आप एक व्यस्क महिला हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं तो आमतौर पर आपके शरीर में 12.1 ग्राम/डीएल से 15.1 ग्राम/डीएल हीमोग्लोबिन की मात्रा होनी चाहिए। तो वहीं गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन की मात्रा 12 से 16 ग्राम प्रति डेसीलीटर (जी/डीएल) के बीच होनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए अधिकाधिक आयरन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए और आसान एक्सरसाइज और योग करना चाहिए।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)


1. प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए?

प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन 12 से 16 ग्राम प्रति डेसीलीटर (जी/डीएल) के बीच होनी चाहिए। एक स्वस्थ गर्भवती महिला में पहली और तीसरी तिमाही में हिमोग्लोबिन की मात्रा 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर (जी/डीएल) या अधिक तो वहीं दूसरे तिमाही में 10.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर (जी/डीएल) या अधिक होना चाहिए।


2. गर्भावस्था के 9 माह के दौरान हीमोग्लोबिन स्तर कितना होना चाहिए?


गर्भावस्था के 9 माह के दौरान हीमोग्लोबिन का स्तर आम तौर पर 9.5 और 13.0 ग्राम/डीएल के बीच होना चाहिए। यह एक सामान्य स्तर है जिससे बच्चे का जन्म बिना किसी दिक्कत के हो सके और मां का स्वास्थ्य भी बेहतर रहे। 


3. गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन कैसे बढ़ाएं?

गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने के लिए अधिकाधिक आयरन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा विटामिन सी और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन भी हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में सहायक है। इस दौरान हल्की एक्सरसाइज और योग करना भी फायदेमंद होता है।


4. प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन कम होने के लक्षण क्या हैं?

प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने पर अत्यधिक थकान और कमजोरी, बालों का तेजी से झड़ना, त्वचा का पीला पड़ जाना, सिर दर्द और चक्कर आना, इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।


5. महिला के शरीर में कितना खून होना चाहिए?

औसतन, वयस्क महिलाओं में लगभग 4.5 लीटर रक्त होता है। हालाँकि, किसी व्यक्ति के शरीर में रक्त की मात्रा कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें शामिल हैं वजन, लिंग, स्थान, आयु और आकार। तो महिला के शरीर में लगभग 4.5 लीटर खून होना चाहिए।


Reference

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Dr. Kalyani Deshmukh, M.D.

Dermatologist

Dr. Deshmukh is an MD (Dermatology, Venerology, and Leprosy) with more than 4 years of experience. She successfully runs her own practice and believes that a personalized service maximizes customer satisfaction.

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