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नीम के 10 फायदे, नुकसान, उपयोग और सावधानियाँ - Neem Ke 10 Fayde


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नीम का पेड़ उन चुनिंदा पौधों में से है जिसके लगभग हर भाग का हम इस्तेमाल कर सकते हैं। नीम के फायदे सैंकड़ों हैं और इसका हर भाग आप इस्तेमाल में ला सकते हैं। जहां नीम की पत्तियां त्वचा को स्वस्थ रखने और खून को साफ करके का काम करती हैं तो वहीं इसकी छालें पाचन तंत्र को बेहतर करती हैं। इसके अलावा इसका तेल, बीज और फूल भी कई प्रकार के रोगों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। 

इसे आप प्रकृति का वरदान कह सकते हैं जो आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है, खासकर कि ग्रामीण इलाकों में। इसकी खासियत और फायदों को देखते हुए ही इसका नाम Wonder Tree यानि अद्भुत वृक्ष भी रखा गया है। प्राचीन समय से ही इस औषधीय पौधे का इस्तेमाल विभिन्न रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता रहा है और आज की आधुनिक दवाओं में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

आप इस वंडर ट्री का भरपूर लाभ प्राप्त कर सकें और अपने स्वास्थ्य को बेहतर कर सकें, इसके लिए ही हमनें नीम के 10 फायदे ब्लॉग को तैयार किया है। इसके माध्यम से आप विस्तारपूर्वक जानेंगे कि नीम क्या है, इससे फायदे और नुकसान क्या हैं, इसका इस्तेमाल कैसे करें, इसके इस्तेमाल से संबंधित क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और साथ ही अन्य अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का जवाब दिया जाएगा।

 

नीम क्या है ? (What is Neem)What is NEEM

नीम एक औषधीय पेड़ है जिसे अद्भुत वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ की खासियत यह है कि इसके सभी भाग का इस्तेमाल विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए किया जाता है और बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल दवाओं में भी होता है। यह कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी को भी ठीक करने के लिए फायदेमंद हो सकता है। 

आमतौर पर इसे आप भारत के ग्रामीण इलाकों में ही पायेंगे। इसके औषधीय गुणों को देखते हुए गांवों में इसे Village Pharmacy यानि ग्राम औषधालय भी कहा जाता है। सदियों से इसका इस्तेमाल विभिन्न त्वचा, दांत और बाल संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता रहा है। इसके औषधीय फायदों को देखते हुए ही इसका इस्तेमाल मॉडर्न एप्लिकेशंस जैसे साबुन, शैंपू, सौंदर्य प्रसाधन और हर्बल सप्लीमेंट में किया जाता है।

 

नीम के 10 फायदे (Neem Ke 10 Fayde)

अब चलिए सविस्तार समझते हैं कि नीम के 10 फायदे (Neem Benefits in Hindi) क्या हैं और आप इसका इस्तेमाल किस प्रकार से कर सकते हैं। हम इसके फायदे बताने के साथ ही उन फायदों को प्राप्त करने के लिए इसके सही इस्तेमाल के बारे में भी बताएंगे। 


१. नीम की पत्तियां बालों के लिए उपयोगी (Neem leaves useful for hair)

भारत की एक बड़ी आबादी बाल झड़ने, सिर की त्वचा में इन्फेक्शन होने, बालों का सही विकास न होने और रूसी से परेशान है। ऐसे में नीम बड़े फायदे की चीज है। इसकी मदद से आप अपने बालों का झड़ना रोक सकते हैं, सिर की त्वचा को संक्रमण मुक्त बना सकते हैं, बाल की लंबाई और मोटाई बढ़ा सकते हैं आदि। Neem in Dermatology: Shedding Light on the Traditional Panacea में प्रकाशित एक आर्टिकल के मुताबिक, नीम का इस्तेमाल बालों के विकास के लिए किया जा सकता है।

इसका कारण है नीम में मौजूद वाहिकाविस्फारक गुण, जोकि सिर की त्वचा में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है। इससे बेहतर रक्त प्रवाह बालों के रोमों को पोषण देता है, जिससे बालों के विकास को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीफंगल और जीवाणुरोधी गुण रूसी और खोपड़ी के संक्रमण से लड़ते हैं। ऐसे में आपको नीम तेल से बालों को अच्छे से मसाज करना चाहिए और साथ ही आप इसे पानी के साथ उबालकर, फिर ठंडा करके बालों पर शैंपू की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह बात हम बखूबी समझते हैं कि नीम आपके बालों और सिर की त्वचा के लिए बेहतरीन है और इसलिए हमने Neem Oil For Hair को तैयार किया है। यह आपकी सिर की त्वचा को स्वस्थ रखता है, आपके बालों को मजबूत बनाता है और साथ ही बालों के विकास को बढ़ावा देता है। अगर आप बालों से संबंधित किसी भी समस्या से परेशान हैं, तो Traya Hair Test दीजिये और उस समस्या का कारण और समाधान दोनों पाइए ।

इसके अलावा अगर आपको रुसी की समस्या है तो आप एनी घरेलु नुस्के भी अपना सकते हैं। कई मामलों में घरेलु नुस्के रुसी को दूर करने में काफी कारगर साबित होते हैं। ऐसे में अगर आप विस्तारपूर्वक जानना चाहते हैं कि रुसी को दूर करने के घरेलु नुस्के क्या हैं तो home remedies for dandruff पर जाएँ।


२. कैविटीज़ और मसूड़ों की बीमारी को रोकता है (Prevents Cavities and Gum disease)

आप अगर कभी ग्रामीण इलाकों में गए होंगे तो देखा होगा कि ग्रामवासी सुबह सुबह ब्रश और टूथपेस्ट नहीं बल्कि नीम की छोटी से ठंडल या टहनी का इस्तेमाल दातों की सफाई के लिए करते हैं। यूट्यूब पर सैंकड़ों विडियोज आपको मिल जाएंगे जिसमें पश्चिकी देशों में नीम की एक टहनियां $50 तक की बिकती हैं। ऐसा क्यों ? क्योंकि नीम में जीवाणुरोधी गुण होते हैं, विशेष रूप से स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स के खिलाफ, जो कैविटी से जुड़ा बैक्टीरिया है।

इसके साथ ही नीम की जीवाणुरोधी क्रिया उन बैक्टीरिया के विकास को रोकने में मदद करती है जो प्लाक निर्माण में योगदान करते हैं। इसके अलावा अगर आपके मसूड़ों में हल्की चोट और सूजन है तो इस परिस्थिति में भी नीम काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद सूजन रोधी गुण मसूड़ों में सूजन को कम करने में मदद करता है। अगर आपके मुंह से बदबू आती है तो भी आप इसका सेवन करना शुरू कर सकते हैं और परिणाम जल्द ही आपके सामने होगा।

 

३. नीम त्वचा के लिए लाभकारी (Neem beneficial for skin)

नीम की पत्तियां और तेल आपकी त्वचा को कई त्वचा संबंधित रोगों से बचा सकती हैं और आपकी त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं। इसमें इसमें शक्तिशाली जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो मुँहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया, जैसे प्रोपियोनिबैक्टीरियम एक्ने से लड़ते हैं। तो वहीं इसमें मौजूद निम्बिडिन जैसे यौगिकों में सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो दाग-धब्बों और काले धब्बों को कम करके त्वचा की रंगत को एक समान बनाते हैं।

इसके अलावा नीम की एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाती है और त्वचा को हाइड्रेट व पोषण देकर सूखापन और परतदार होने से बचाती है। ऐसे में अगर आप ये सारे फायदे चाहते हैं और अपनी त्वचा को निखार देना चाहते हैं तो इसका इस्तेमाल अवश्य करें। आप इसका तेल ऑनलाइन खरीदकर इस्तेमाल कर सकते हैं या इसे पानी के साथ उबालकर, गुनगुने पानी से रोजाना नहा सकते हैं।

 

४. रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है (Strengthens immunity)

हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता मौजूद होती है जो हमारी कई रोगों से रक्षा करती है। जिन व्यक्तियों का रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत नहीं होता है, वे अक्सर बीमार पड़ जाते हैं और बीमार पड़ने के बाद जल्द ठीक भी नहीं हो पाते। ऐसे में अगर आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्यून सिस्टम को मजबूत करना चाहते हैं तो नीम का इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल नीम में कई ऐसे गुण होते हैं जो आपकी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

उदाहरण के तौर पर, नीम फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है जो मुक्त कणों को बेअसर करता है और पूरे प्रतिरक्षा स्वास्थ्य को बेहतर करता है। इसमें मौजूद विषहरण गुण सूजन को कम करते हैं जिससे एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली को बल मिलता है। इसमें इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण भी मौजूद होते हैं जो मैक्रोफेज और लिम्फोसाइट्स जैसी प्रतिरक्षा कोशिकाओं की गतिविधि को विनियमित और बढ़ाने में मदद करता है। आप Neem Capsules और Neem Tea का सेवन करके अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं।

 

५. ब्लड शुगर नियंत्रित करता है (Controls blood sugar)

वर्तमान समय का हमारा खान पान और रहन सहन कुछ इस प्रकार का बन चुका है कि हम अक्सर विभिन्न बीमारियों से जूझते रहते हैं। डायबिटीज और उच्च रक्तचाप भी ऐसी ही बीमारियां हैं जो हमारे खुद के कारण जन्म लेती हैं। आज डायबिटीज से लाखों की संख्या में लोग पीड़ित हैं और कइयों की मृत्यु तक हो जाती है। इस परिस्थिति में भी नीम किसी वरदान से कम नहीं है। जी हां, इसका सेवन आपके ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है और साथ ही रक्तचाप को भी रेग्यूलेट करता है।

दरअसल नीम में इंसुलिन-मिमेटिक गुणों वाले यौगिक होते हैं जो इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करके रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, नीम ग्लूकोज चयापचय में शामिल एंजाइमों का समर्थन करता है जिससे ऊर्जा के लिए ग्लूकोज के कुशल विघटन में सहायता करता है। ऐसे में अगर आप ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना चाहते हैं तो इसका सेवन Neem Capsules या Neem Powder के तौर पर कर सकते हैं। 

 

६. कीट पतंगों से छुटकारा दिलाता है (Helps get rid of insect & pests)

क्या आपको पता है कि आप नीम का इस्तेमाल मच्छरों, कीड़ों, पतंगों आदि को भगाने के लिए भी कर सकते हैं ? शायद आपको न पता हो पर नीम में एजाडिराचैटिन जैसे यौगिक होते हैं जो प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में कार्य करते हैं। साथ ही नीम का तेल मच्छरों के खिलाफ प्रभावी पाया गया है। त्वचा पर नीम का तेल लगाने या नीम आधारित मच्छर निरोधकों का उपयोग करने से मच्छरों के काटने को रोकने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीण इलाकों में अभी भी नीम की पत्तियों का तेल या लेप मच्छरों से बचने और इसकी पत्तियों को जलाकर मच्छरों को दूर भगाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। अगर हम हालिया उदाहरण देखें तो खेत में फेंके जाने वाला यूरिया भी अब नीम लेपित ही आ रहा है जिससे किसानों को कई फायदे मिल रहे हैं। इनके इस्तेमाल से न सिर्फ मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर हुआ बल्कि कीट एवं रोगों के आक्रमण में भी कमी आई।

 

७. बीमारी फैलाने वाले कीटाणु से मुक्ति दिलाता है (Provides relief from disease causing germs)

हम अक्सर अपने घरों के फर्श और टॉयलेट की सफाई के लिए हार्पिक, कॉलिन और अन्य कई ब्रांड्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि ये ब्रांड्स वाकई कारगर हैं लेकिन आप चाहें तो नीम पानी या नीम से तैयार साफ़ करने वाला घोल भी इस्तेमाल में ला सकते हैं। दरअसल नीम में जीवाणुरोधी गुण होते हैं, जिसका अर्थ है कि नीम के पानी या नीम आधारित सफाई घोल का उपयोग करने से घर में फर्श/सतहों को कीटाणुरहित करने में मदद मिल सकती है। 

इसका घोल बनाना वाकई काफी आसान है। बस आपके पास होना चाहिए नीम की पत्तियां और सफेद सिरका। आप नीम की पत्तियों को उबाल कर और फिर छान करके ठंडे पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बाद एक बोतल में नीम का पानी और सफेद सिरकरा मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें और फिर उन जगहों पर स्प्रे करें जिन्हें आप कीटाणु रहित करना चाहते हैं।  इसके अलावा आप नीम तेल का पानी और सोप के साथ इस्तेमाल करके नीम फर्श क्लीनर भी तैयार कर सकते हैं।

 

८. सांस सम्बन्धित समस्याओं को दूर करता है  (Relieves respiratory problems)

भारी प्रदूषण, नशा पदार्थों और अन्य कई कारणों से लोग सांस संबंधित बीमारियों से जूझ रहे हैं। हर वर्ष लाखों लोग सांस संबधित बीमारियों का सामना करते हैं और इससे कइयों की मृत्यु भी हो जाती है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि ये बीमारियां आपको छुएं भी न तो बढ़िया लाइफस्टाइल के साथ साथ नीम का इस्तेमाल आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। 

नीम में सूजन-रोधी प्रभाव वाले यौगिक होते हैं जिसके कारण यह श्वसन द्वार में सूजन को कम करता है, श्वसन संबंधी स्थितियों के लक्षणों को कम करता है। साथ ही, नीम श्वसन द्वार से बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है जिससे जमाव से राहत मिलती है और सांस लेने में आसानी होती है। नीम एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना भी होता है जो श्वसन प्रणाली को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाता है जिससे समग्र फेफड़ों के स्वास्थ्य में मदद मिलती है।

 

९. मलेरिया के इलाज में प्रभावी  (Effective in treating malaria)

कुछ शोधों में यह पाया गया है कि नीम के कुछ घटकों में मलेरिया-रोधी प्रभाव हो सकते हैं। प्राचीन समय में भी इसका इस्तेमाल मलेरिया रोगियों के लिए किया जाता रहा है। आइए समझते हैं कि यह कैसे मलेरिया के इलाज में प्रभावी साबित हो सकता है। पहला तो नीम में पाए जाने वाले गेडुनिन और क्वेरसेटिन जैसे यौगिकों ने कुछ अध्ययनों में मलेरिया-रोधी गुणों का प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही नीम का उपयोग पारंपरिक रूप से विभिन्न संस्कृतियों में बुखार को कम करने के लिए किया जाता रहा है, जो मलेरिया का एक प्रमुख लक्षण है। 

इसके अलावा हमने आपको पहले ही बताया कि इसका इस्तेमाल आप Mosquito Repellant के तौर पर भी कर सकते हैं। मलेरिया का प्रमुख कारण मच्छर का काटना ही होता है, ऐसे में अगर आप नीम तेल या नीम क्रीम का लेप शरीर पर लगाएं तो आप मच्छरों के काटने से बच सकते हैं। वैज्ञानिक लगातार नीम का मलेरिया के खिलाफ इस्तेमाल पर शोध भी कर रहे हैं। कुछ Clinical Trials ने मलेरिया के उपचार और रोकथाम के संदर्भ में नीम आधारित उत्पादों के उपयोग की जांच भी की है।

 

१०. पेट संबंधित बीमारियों में सहायक (Helpful in stomach related diseases)

आप तो जानते ही होंगे कि हमारी ज्यादातर बीमारियों की शुरुआत या जड़ पेट ही होती है। पाचन क्रिया बिगड़ने पर अचानक से हम कई बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में नीम बड़े काम आ सकता है। नीम में प्राकृतिक जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो पेट में हानिकारक बैक्टीरिया के विकास को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, संभावित रूप से बैक्टीरिया के संक्रमण को रोकते हैं। साथ ही, नीम में सूजन-रोधी प्रभाव वाले यौगिक होते हैं जो पेट की परत में सूजन को शांत करने में मदद कर सकते हैं, जिससे गैस्ट्राइटिस जैसी स्थितियों से राहत मिलती है।

इसके अलावा अगर आपको अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है और अल्सर से बचना चाहते हैं तो भी इसका सेवन कर सकते हैं। नीम में संभावित अल्सर को रोकने वाले गुणों का अध्ययन किया गया है जो पेट की परत की रक्षा करने और अल्सर के विकास को रोकने में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, नीम में हल्के रेचक गुण होते हैं जो नियमित मल त्याग को बढ़ावा देने और कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।

 

नीम के अन्य फायदे

११. लीवर को स्वस्थ रखता है (keeps the liver healthy)

अगर आप डॉक्टर की परामर्श के साथ नीम कैप्सूल, नीम चाय, नीम पाउडर और नीम तेल मसाज करते हैं तो यह आपके लवर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आइए स्काझते हैं कैसे ? दरअसल नीम एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो लिवर कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाता है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। नीम लीवर की प्राकृतिक विषहरण प्रक्रिया का समर्थन करता है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में मदद करता है, जिससे लीवर पर बोझ कम होता है।

इसके साथ ही, नीम में सूजन-रोधी प्रभाव वाले यौगिक होते हैं जो लीवर में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे लीवर के समग्र स्वास्थ्य में मदद मिलती है। प्राचीन समय में नीम का इस्तेमाल लीवर से संबंधित परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता था। वर्तमान समय में Fatty Liver की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, इस समस्या में भी नीम सहायक हो सकता है। 


१२. रैशेज और घाव को खत्म करता है ( Helpful in eliminating rashes and wounds)

अगर आपको कोई घाव हो जाता है या आप रैशेज की समस्या से जूझ रहे हैं तो नीम तेल या नीम का पेस्ट बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। सदियों से इसका इस्तेमाल घावों को भरने और ठीक करने के लिए किया जाता रहा है। नीम में प्राकृतिक जीवाणुरोधी गुणों वाले यौगिक होते हैं जो घावों और चकत्ते में जीवाणु संक्रमण को रोकने और मुकाबला करने में मदद करते हैं। 

इसके साथ ही, नीम में एंटी-इंफ्लेमेटरी यौगिक और एंटीफंगल गुण भी होते हैं जो प्रभावित क्षेत्र में सूजन को कम करते हैं और फंगल संक्रमण को और चकत्ते को ठीक करने में योगदान दे सकते हैं। नीम कोलेजन उत्पादन और ऊतक मरम्मत का भी  समर्थन करता है जो घावों और कटौती की उपचार प्रक्रिया को तेज करता है। 


१३. गठिया और सूजन को दूर करता है ( Relieves arthritis and swelling)

वर्ष 2017 की एक स्टडी के मुताबिक, 180 मिलियन से ज्यादा भारतीय लोग आर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हैं। था घुटनों में होने वाला एक रोग है जो जानलेवा तक साबित हो सकता है। तो नीम इसमें कैसे सहायक है ? चलिए जानते हैं। देखिए, नीम में Anti-inflammatory properties होती हैं यह जोड़ों में सूजन को कम करने में मदद करता है, जिससे गठिया से पीड़ित व्यक्तियों को राहत मिलती है।

इसके साथ ही, नीम के तेल में चिकनाई वाले गुण होते हैं जो जोड़ों की गतिशीलता बेहतर करते हैं और गठिया वाले व्यक्तियों के जोड़ों की कठोरता को कम कर सकते हैं। इसके अलावा, यह आर्थराइटिस के गंभीर रूप लेने को भी रोक सकता है। यह जोड़ों में उपास्थि (cartilage) की सुरक्षा में योगदान दे सकता है जो संयुक्त संरचनाओं की अखंडता का समर्थन करता है, संभवतः गठिया की प्रगति को धीमा कर देता है।


१४. गर्भनिरोधक के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है (Can be used as a contraceptive)

आप शायद चौंक गए होंगे कि भला कैसे नीम गर्भनिरोधक का कार्य कर सकता है? परंतु, यह सच है। कुछ मामलों में यह गर्भनिरोधक का कार्य भी कर सकता है। कुछ संस्कृतियों में नीम का उपयोग पारंपरिक रूप से इसके गर्भनिरोधक गुणों के लिए किया जाता रहा है। इसके लिए नीम तेल का इस्तेमाल किया जाता था। 

ऐसा माना जाता है कि नीम का तेल शुक्राणु को स्थिर करने और निषेचन को रोकने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, कुछ पारंपरिक प्रथाओं में संभावित गर्भनिरोधक प्रभावों के लिए नीम की पत्ती के अर्क का सेवन शामिल है। National Library of Medicine ने भी Breakthrough in Population Control में इसपर विस्तार से बात की है। हालांकि हम आपको सलाह देते हैं कि अगर आप सुरक्षित यौन संबंध बनाना चाहते हैं तो आपके पास एक बैकअप गर्भनिरोधक होना चाहिए जैसे कंडोम।


१५. यह कैंसर के इलाज में सक्षम है ( It is capable of treating cancer)

नीम को यूंही वंडर ट्री का नाम नहीं दिया जाता है, दरअसल यह कैंसर जैसे प्राणघाती बीमारी का भी इलाज कर सकती है। यह कैंसर जैसे रोग के रोकथाम के लिए कैसे सहायक है, इसपर काफी रिसर्च चल रही है तो कुछ रिसर्च की जा चुकी हैं। Anticancer Agents in Medicinal Chemistry जर्नल में छपे एक शोध में नीम की पत्ती के अर्क की कैंसररोधी क्षमता की जांच की जानकारी दी गई थी। अध्ययन में सुझाव दिया गया कि नीम का अर्क कैंसर कोशिकाओं पर प्रसाररोधी प्रभाव प्रदर्शित करता है, जिससे संभावित रूप से उनकी वृद्धि बाधित होती है।

इसके अलावा, नीम का अध्ययन इसके इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभावों के लिए किया गया है। 2016 में एक अध्ययन में प्रतिरक्षा प्रणाली पर नीम के पत्ते के अर्क के प्रभाव का पता लगाया गया। हालांकि सीधे तौर पर कैंसर पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया है, प्रतिरक्षा प्रणाली का मॉड्यूलेशन कैंसर की रोकथाम और उपचार के लिए प्रासंगिक है। उम्मीद है कि लगातार हो रही शोधों से कुछ सकारात्मक निकल कर आएगा जो किसी क्रांति से कम नहीं होगा।

 

नीम के औषधीय गुण (Medicinal properties of Neem)

नीम के फायदे जानने से पहले आपको इसका एक ओवरव्यू देना आवश्यक है, ताकि आप समझ सकें कि इसे क्यों अद्भुत वृक्ष और ग्राम औषधालय कहा जाता है। नीचे दिए टेबल में आप देख सकते हैं कि इसके विभिन्न भागों के औषधीय गुण क्या हैं और उनका इस्तेमाल किन रोगों को ठीक करने के लिए किया जा सकता है।

 

औषधीय गुण

नीम के घटक

अनुप्रयोग

एंटीबैक्टीरियल

नीम तेल, नीम पत्तियाँ

दंत देखभाल, त्वचा देखभाल और घाव भराई में प्रयुक्त

एंटीवायरल

नीम एक्सट्रेक्ट, नीम तेल

वाइरल संक्रमणों से निपटने में मदद कर सकता है

एंटीफंगल

नीम तेल, नीम पत्तियाँ

विभिन्न कवकीय संक्रमणों के खिलाफ प्रभावी

एंटिसेप्टिक

नीम पत्तियाँ, नीम तेल

घाव और कटाव को स्वच्छ करने के लिए प्रयुक्त

एंटी-इन्फ्लैमेटरी

नीम छाल, नीम पत्तियाँ

विभिन्न स्थितियों में सूजन को कम करने में मदद करता है

एंटीऑक्सीडेंट

नीम पत्तियाँ, नीम तेल

समग्र स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए

एनल्जेसिक (पेन-राहत)

नीम तेल, नीम पत्तियाँ

जोड़ों और पेशियों में दर्द को कम करने के लिए प्रयुक्त

इम्यूनोमोड्युलेटरी

नीम एक्सट्रेक्ट्स, नीम पत्तियाँ

प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन करने में मदद करता है

ब्लड प्यूरीफायर

नीम पत्तियाँ

रक्त को शुद्ध करने और शरीर को विषमुक्त करने के लिए माना जाता है

कीटनाशक/कीटहर

नीम तेल, नीम बीज

प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में कार्य करता है, कीटाणुओं को दूर करता है

हेपाटोप्रोटेक्टिव (लिवर समर्थन)

नीम एक्सट्रेक्ट्स, नीम पत्तियाँ

लिवर के स्वास्थ्य और कार्य का समर्थन करता है

एंटीडायबेटिक

नीम पत्तियाँ

रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है

डर्मटोलॉजिकल लाभ

नीम तेल, नीम पत्तियाँ

विभिन्न त्वचा स्थितियों के उपचार में उपयोगी

 

तो आपने देखा कि किस प्रकार यह हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है और कई प्रकार की बीमारियों से हमारी रक्षा कर सकता है। इसके साथ ही हम आपको बताते चलें कि नीम के कैंसर रोधी और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी (प्रतिरक्षा प्रणाली को विनियमित करने की क्षमता) गुणों पर भी अनुसंधान किया जा रहा है और अगर अनुसंधान का परिणाम सकारात्मक आता है तो यह कैंसर को मात देने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जोकि मानव इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि होगी।

 

नीम के नुकसान (Neem Ke Nuksaan) 

जहां नीम के कई फायदे होते हैं तो वहीं इसके कुछ नुकसान भी हैं। आइए संक्षेप में समझते हैं कि नीम के इस्तेमाल से आपको क्या नुकसान हो सकते हैं ताकि आप नीम के फायदे और नुकसान, दोनों पहलुओं को समझ सकें।

 

१. एलर्जी हो सकता है (Neem can cause allergies)

नीम का इस्तेमाल सभी व्यक्तियों के लिए फायदेमंद साबित नहीं हो सकता है, बल्कि इससे आपको एलर्जी भी हो सकती है। एलर्जी की प्रतिक्रिया खुजली, लाल धब्बे या सूजन के रूप में प्रकट हो सकती है। नीम का बड़े पैमाने पर उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट करना महत्वपूर्ण है। साथ ही अगर आप इसका सेवन अधिक कर लेते हैं तो आपके पेट में जलन और मतली आदि हो सकती है।

 

२. गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन से बचें (Avoid consumption during pregnancy)

गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन आपके और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नीम उत्पादों के साथ सावधानी बरतनी चाहिए। नीम को पारंपरिक रूप से गर्भनिरोधक के रूप में उपयोग किया जाता रहा है और गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान इसकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस प्रमाण या शोध नहीं मौजूद है।

 

३. ब्लड शुगर कम हो सकता है (blood sugar may decrease)

ब्लड शुगर नियंत्रण में रखना जरूरी है लेकिन अगर यह जरूरत से ज्यादा कम हो जाए तो परेशानी बढ़ जाती है। नीम की पत्तियों का इस्तेमाल ब्लड शुगर को कम करने के लिए किया जाता है लेकिन अगर आप इसका सेवन जरूरत से ज्यादा कर लेते हैं तो आपका ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम भी हो सकता है जोकि नुकसानदेह है।


नीम के विभिन्न उपयोग (Various uses of Neem)

नीम अब सिर्फ ग्रामीण औषधालय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक औषधालय बन चुका है। इसके बहुमुखी गुणों के कारण इसका विभिन्न उत्पादों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। चलिए देखते हैं कि इसका उपयोग किन उत्पादों में किया जाता है:

१. त्वचा की देखभाल के उत्पाद 

नीम का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर साबुन, क्रीम, लोशन और फेस वॉश से जुड़े उत्पादों में किया जाता है। नीम के तेल और नीम के अर्क का उपयोग त्वचा देखभाल उत्पादों में उनके जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी गुणों के लिए किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि वे मुँहासे, एक्जिमा और अन्य त्वचा संबंधित दिक्कतों में मदद करते हैं।

२. बालों की देखभाल के उत्पाद

जैसा कि हमने आपको नीम के फायदे सेक्शन में ही बताया, यह बालों के लिए काफी फायदेमंद होता है। नीम शैंपू, कंडीशनर और बालों के तेल में आम सामग्री है। यह स्वस्थ खोपड़ी को बढ़ावा देता है, रूसी को कम करता है और बालों के विकास में सहायता करता है।

३. मुंह की देखभाल के उत्पाद 

नीम में जीवाणुरोधी गुण मौजूद होता है और इसी कारण से इसका उपयोग टूथपेस्ट, माउथवॉश और डेंटल क्रीम में किया जाता है। यह मुंह की स्वच्छता बनाए रखने, मसूड़ों की सूजन को कम करने और कैविटी को रोकने में सहायक है।

 

नीम का इस्तेमाल कैसे करें ?

अगर आप नीम के औषधीय गुणों का पूरा फायदा प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको इसका सही ढंग से इस्तेमाल करना होगा। चलिए हम आपको बताते हैं कि नीम का इस्तेमाल कैसे करें ताकि आप इसके औषधीय गुणों को प्राप्त कर सकें:

  • ‌आप सुबह 5 से 7 नीम की पत्तियां चबा कर खाएं
  • ‌नीम के बीज से तेल को अलग कर लें और अपनी त्वचा और बालों पर इस्तेमाल करें
  • ‌आप रोज सुबह नीम की टहनियों को दातुन के रूप में बनाकर, दांत की सफाई कर सकते हैं
  • ‌नीम की पत्तियों को पानी के साथ उबालकर, फिर पानी ठंडा करके नहा सकते हैं
  • ‌नीम के बीजों को पीसकर पाउडर बना लें, पानी के साथ मिलाएं और पौधों के लिए प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में उपयोग करें

 

निष्कर्ष 

नीम एक औषधीय पेड़ है और इसके ढेरों फायदे हैं। लगातार इसके फायदों पर रिसर्च चल रही है और अनुमान है कि आने वाले समय में यह अन्य कई गंभीर बीमारियों के इलाज में भी सहायक साबित होगा। नीम के फायदे और नुकसान दोनों हैं, लेकिन इसके फायदे उल्लेखनीय हैं जिसका लोहा विज्ञान जगत भी मानता है। उम्मीद है कि आपको Neem Ke 10 Fayde और इससे संबंधित अन्य बिंदुओं पर जरूरी सभी जानकारियां मिल गई होंगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

१. नीम के क्या क्या फायदे हैं ?

नीम के कई फायदे हैं जैसे कि यह त्वचा को साफ रखता है, बालों को स्वस्थ करता है, दांत और मसूड़ों की रक्षा करता है और उन्हें मजबूत बनाता है और साथ ही हमारी जीवन शैली को सुधारने में मदद करता है।

२. सुबह खाली पेट नीम का जूस पीने से क्या होता है ?

सुबह खाली पेट नीम का जूस पीने से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, यह शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाता है, पाचन तंत्र को शुद्ध करता है, रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है आदि।

३. नीम कितने दिन तक पीना चाहिए ?

आप नीम का जूस का सेवन तब तक कर सकते हैं जबतक आप चाहें। हालांकि अगर आपको इसकी वजह से कोई एलर्जी या समस्या हो तो तुरंत इसका सेवन छोड़ दें।

४. नीम से कौन कौन से रोग ठीक हो सकते हैं ?

नीम से कई रोग जैसे मुँहासे, एक्जिमा, सोरायसिस, जिल्द की सूजन, मसूड़ों के रोग, दांतों की सड़न, सांसों की दुर्गंध, अपच, कब्ज, अल्सर, मलेरिया, मधुमेह, गठिया ठीक हो सकते हैं।

५. नीम का जूस कितनी मात्रा में पीना चाहिए ?

नीम का जूस आपको अधिकतम 1 छोटा गिलास पीना चाहिए। अधिक मात्रा में नीम जूस का सेवन आपको नुकसान पहुंचा सकता है।

६. नीम के बीज के फायदे क्या हैं ?

नीम के बीज के ढेरों फायदे हैं जैसे यह त्वचा को स्वस्थ बनाता है और इन्फेक्शन और एक्ने क्यों दूर करता है। साथ ही यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन तंत्र को बेहतर करने, शरीर को सुरक्षा प्रदान करने में भी सहायक है। इसके अलावा भी neem ke beej ke fayde कई हैं, जैसे इसका इस्तेमाल घाव को ठीक करने और पेड़पौधों को कीटाणु रहित करने के लिए किया जाता है।

७. नीम के पानी से चेहरा धोने का क्या फायदा है ?

अगर आप प्रतिदिन नीम के पानी से चेहरा धोते हैं तो आपके चेहरे का निखार बढ़ेगा। इसमें मौजूद एंटी माइक्रोबियल गुण आपके चेहरे से इन्फेक्शन और एक्ने को दूर करने में मदद करेंगे और आपका चेहरा खुबसूरत और चमकदार बनेगा। उम्मीद है आप समझ गए होंगे कि neem ke pani se face dhone ke fayde क्या हैं।

८. नीम की कोपल के फायदे क्या हैं ?

Neem ki kopal ke fayde कई हैं जैसे कि यह शरीर से गन्दगी को बाहर निकालता है और साथ ही खून की भी सफाई करता है। इसके अलावा नीम की कोपल का सेवन आपको त्वचा सम्बंधित बिमारियों क साथ ही पाचन तंत्र से जुडी समस्याओं को दूर करने में भी मदद कर सकता है।

Reference

  1. Anti-Cancer Agents in Medicinal Chemistry: Anti-Cancer Agents in Medicinal Chemistry | Bentham Science
  2. Medically reviewed by Sade Meeks, MS, RD, Nutrition — By Fatima Hallal, APD on May 28, 2021 - What Is Neem Extract? Benefits, Uses, Risks, and Side Effects: What Is Neem Extract? Benefits, Uses, Risks, and Side Effects (healthline.com)
  3. An overview of Neem (Azadirachta indica) and its potential impact on health by Science Direct: An overview of Neem (Azadirachta indica) and its potential impact on health - ScienceDirect

अस्वीकरण: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है, न कि किसी बीमारी के इलाज के लिए। आर आप किसी भी बीमारी से जूझ रहे हैं तो आपको सबसे पहले डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

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Dr. Shailendra Chaubey, BAMS

Ayurveda Practioner

A modern-day Vaidya with 11 years of experience. He is the founder of Dr. Shailendra Healing School that helps patients recover from chronic conditions through the Ayurvedic way of life.

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