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Avipattikar Churna uses in Hindi | अविपत्तिकर चूर्ण


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अविपत्तिकर चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है जो कई स्वास्थ्य विपत्तियों को आपसे दूर रखता है। इस चूर्ण का सेवन खासतौर पर पाचन संबंधित दिक्कतों को दूर करने के लिए किया जाता है।  14 जड़ी बूटियों से बना यह चूर्ण पाचन संबंधित समस्याओं का सामना कर रहे व्यक्तियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस चूर्ण में आंवला, बिभीतकी, हरीतकी, पिप्पली, मैरिका, सुंती, मुस्ता, पात्रा, लवंगा, इलाइची, त्रिवृत, विदा, विदंगा और सरकारा जैसी 14 औषधियों की शक्तियां मौजूद हैं।

यदि आप पाचन शक्ति बढ़ाना चाहते हैं, कब्ज की समस्या दूर करना चाहते हैं, गैस्ट्राइटिस का उपचार चाहते हैं तो इस चूर्ण का सेवन करना शुरू कर दें। अगर आप इस चूर्ण का उपयोग करने जा रहे हैं या अपनी पाचन शक्ति को बढ़ाने के तरीके की तलाश में हैं तो यह ब्लॉग आपके लिए सहायक होगा। इस ब्लॉग में हम आपको Avipattikar Churna Uses In Hindi के साथ साथ इसके नुकसान, उपयोग, तासीर, सेवन का तरीका सबके बारे में जानकारी देंगे।


अविपत्तिकर चूर्ण क्या है (What is Avipattikar Churna in Hindi)

अविपत्तिकर चूर्ण 14 जड़ी बूटियों से बनाई गई आयुर्वेदिक औषधि है जिसका सेवन खासतौर पर पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस चूर्ण में आंवला, बिभीतकी, हरीतकी, पिप्पली, मैरिका, सुंती, मुस्ता, पात्रा, लवंगा, इलाइची, त्रिवृत, विदा, विदंगा और सरकरा की औषधीय शक्तियां मौजूद होती हैं जिसके सेवन से पाचन शक्ति मजबूत बनती है, कब्ज की समस्या दूर होती है और गैस्ट्राइटिस के उपचार में मदद मिलती है। 

आयुर्वेद किसी भी रोग को तीन दोषों के साथ जोड़कर देखता है, वात, पित्त और कफ। आयुर्वेद के मुताबिक अगर इन तीनों दोषों को शांत कर लिया जाए तो व्यक्ति कभी बीमार नहीं पड़ेगा। ऐसे में अविपत्तिकर या अविपट्टिकर चूर्ण शरीर में पित्त दोषों को शांत करता है। पित्त दोष पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं से जुड़ा हुआ है, जिन्हें दूर करने में यह चूर्ण काफी फायदेमंद साबित होता है।

इस चूर्ण के साथ ही आप Healthy Gut Combo का भी सेवन कर सकते हैं। इस कॉम्बो में आपको दो हर्बल सप्लीमेंट्स Health Tatva और Gut Shuddhi मिलते हैं जिनमें सोंठ, बड़ी काली मिर्च, अजवाइन, लौंग, इलाइची, अदरक, पीपली, जीरा जैसी 15+ से अधिक जड़ी बूटियों का मिश्रण है जिसके कई फायदे मिलते हैं। इसके सेवन से अस्वस्थ आंत, कब्ज, पेट में गैस, शरीर में विषाक्त पदार्थ, बालों का झड़ना, खराब मूड, कमजोर हड्डियों जैसी कई समस्याओं का उपचार होता है। यह vegan, sugar free और 100% natural भी है। तो अभी इसे ऑनलाइन घर मंगाएं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाएं।


अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे (Avipattikar Churna Uses In Hindi)

अविपत्तिकर चूर्ण के कई फायदे होते हैं। खासतौर पर इसके सेवन से पाचन शक्ति मजबूत बनती है, कब्ज, पेट में गैस बनने और सीने में जलन समस्या दूर होती है, गैस्ट्राइटिस के उपचार में मदद मिलती है, लीवर का स्वास्थ्य बेहतर होता है, बालों का झड़ना कम होता है, तनाव से मुक्ति मिलती है, त्वचा में निखार आता है, मूत्रवर्धक फायदे मिलते हैं और फेफड़ों का स्वास्थ्य बेहतर होता है।


1. पाचन तंत्र मजबूत बनता है (Digestive system becomes stronger)

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया आयुर्वेद हर रोगों को तीन दोषों से जोड़कर देखता है, पित्त, कफ और वात। पाचन तंत्र और पाचन क्रिया को आयुर्वेद में पित्त दोषों से जोड़कर देखा गया है। अगर शरीर में पित्त दोष बढ़ जाए तो हाइपरएसिडिटी, सीने में जलन और अल्सर जैसी कई पाचन संबंधित दिक्कतें हो सकती हैं। इन दिक्कतों को दूर करने में अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे हैं क्योंकि इस चूर्ण में आंवला और बिभीतकी के गुण मौजूद होते हैं।

ये दोनों ही आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां शरीर में ठंडा प्रभाव डालती हैं जिससे पित्त दोष में कमी आती है। साथ ही अविपत्तिकर चूर्ण की तासीर ठंडी होने की वजह से पाचन तंत्र को शांत होता है, हाइपरएसिडिटी, सीने में जलन और अल्सर जैसी दिक्कतें दूर हो जाती हैं। इसके अलावा इस चूर्ण में पिप्पली और मुस्ता का भी मिश्रण होता है जिसकी वजह से पाचन अग्नि बढ़ती है और भोजन का पाचन सुचारू रूप से हो पाता है। 


2. त्वचा में निखार लाता है (Makes skin glow)

अविपत्तिकर चूर्ण के सेवन से त्वचा में भी निखार आता है। हालांकि यह सीधे तौर पर त्वचा को साफ और चमकदार तो नहीं बनाता लेकिन शरीर पर एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव अवश्य डालता है। इस चूर्ण में ऐसी जड़ी बूटियां मिश्रित हैं जो शरीर पर एंटीऑक्सीडेंट्स प्रभाव डालती हैं जिसकी वजह से ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस की समस्या दूर होती है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस होने पर त्वचा बेरुखी और बेजान नजर आती है, जिसे यह चूर्ण दूर करता है।

साथ ही, पित्त दोष में असंतुलन मुँहासे और चकत्ते जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं से जुड़ा होता है। अविपत्तिकर चूर्ण के पित्त-संतुलन गुण, जैसा कि हमने पहले भी बताया है, स्वस्थ त्वचा में योगदान कर सकते हैं। इसके अलावा इस चूर्ण के सेवन से आंतों से विषाक्त पदार्थ भी बाहर निकल जाते हैं जिससे त्वचा में निखार आता है और कई त्वचा रोग दूर होते हैं।


3. बालों का झड़ना कम करता है (Reduces hair fall)

अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे बालों का झड़ना रोकने के लिए भी हैं। अगर आपके बाल झड़ना शुरू हुए हैं तो इस चूर्ण के सेवन से समस्या दूर हो सकती है। बालों का झड़ना सीधे तौर पर आंतों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ होता है। आंत माइक्रोबायोम हार्मोन को नियंत्रित करता है जो बालों के विकास के चरणों को नियंत्रित करता है, जैसे एस्ट्रोजेन, थायराइड हार्मोन और मेलाटोनिन। स्वस्थ आंत भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों को शरीर में सही ढंग से अवशोषित भी करता है जिससे बालों और सिर की त्वचा स्वस्थ बनती है।

हालांकि अगर आप तेजी से बालों के झड़ने से परेशान हैं, आपके सिर के बाल गायब हो रहे हैं या आप नए बाल उगाना चाहते हैं तो हम आपको Free Hair Test की सलाह देंगे। Traya का यह फ्री टेस्ट बालों के झड़ने के 20 से भी अधिक कारणों का विश्लेषण करता है और सटीक कारण का पता लगाता है। जब आपके बालों के झड़ने का सटीक कारण हम जान जाते हैं तो आपको फ्री कोच, फ्री डाइट प्लान और फ्री रिपोर्ट भी मिलती है। इसके बाद हम आपको personalised treatment प्रदान करते हैं जिसके नियमित इस्तेमाल से आपके बालों का झड़ना बंद हो जायेगा और नए बाल उगने लगेंगे।


4. लीवर को स्वस्थ रखता है (Makes liver healthy)

लीवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो अगर अस्वस्थ हो जाए तो आपको कई बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर ऊपरी पेट में दर्द, मतली, भूख न लगना, थकान और अस्वस्थता, हल्के रंग का मल, पाचन संबंधी कठिनाइयाँ, वजन घटना, मांसपेशियों की हानि, बासी गंध वाली सांस, और हल्की मस्तिष्क हानि जैसी कई दिक्कतें हो सकती हैं। इन बीमारियों के जोखिम को दूर रखने के लिए और अपने लीवर को स्वस्थ रखने के लिए आप अविपत्तिकर चूर्ण का सेवन कर सकते हैं।

दरअसल, आयुर्वेद के मुताबिक पित्त दोष में असंतुलन सूजन से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि अविपत्तिकर चूर्ण की कुछ जड़ी-बूटियों में शीतल गुण होते हैं जो संभावित रूप से पित्त संबंधी सूजन को कम कर सकते हैं। साथ ही आंत के माध्यम से पाचन और अपशिष्ट उत्पादों के निष्कासन को बढ़ावा देकर, अविपत्तिकर चूर्ण लीवर पर बोझ को कम करने में मदद कर सकता है। इससे लीवर का स्वास्थ्य बेहतर होता है और वह सुचारू रूप से कार्य करने में क्षमतावान बनता है।


5. वजन प्रबंधन में मददगार है (Helps in weight management)

अविपत्तिकरण चूर्ण के फायदे वजन प्रबंधन के लिए भी हैं। इस चूर्ण का नियमित सेवन करने से शरीर में मौजूद ऐसे विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिन्हें पचाया नहीं जा सका है। इन विषाक्त पदार्थों को शरीर से निकालकर यह चूर्ण एक healthy metabolism को बढ़ावा देता है जोकि वजन प्रबंधन के लिए अतिआवश्यक है। साथ ही यह चूर्ण भोजन को पचाने और शरीर में सही ढंग से अवशोषित करने में भी मदद करता है जिससे वजन प्रबंधन में मदद मिलती है।

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया, Avipattikar Churna में अदरक जैसे कई आयुर्वेदिक औषधि के गुण मौजूद हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मुताबिक अदरक जैसे आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन से बार बार भूख लगने की आवृत्ति में कमी आती है। जब आप कम भोजन करते हैं तो इसका अर्थ है कि आप कम कैलरी का भी सेवन करते हैं जिससे वजन प्रबंधन में मदद मिलती है।


6. तनाव से राहत दिलाता है (Helps relieve stress)

तनाव हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है जिसकी वजह से हम कई बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। तनाव डिप्रेशन, मोटापा, ब्लड प्रेशर, थकान, कमजोरी जैसी कई समस्याओं को साथ लेकर आता है इसलिए इससे कोसों दूर रहने में ही भलाई है। तनाव से आपको कोसों दूर रखने में अविपत्तिकर चूर्ण मदद करता है। आयुर्वेद और मॉडर्न मेडिकल साइंस दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं। इस चूर्ण में आंवला और बिभीतकी का मिश्रण होता है और माना जाता है कि आंवला और बिभीतकी में शीतलन गुण होते हैं जो पित्त को शांत करने और मन की शांत स्थिति को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।

इसके साथ ही, आधुनिक विज्ञान कहता है कि एक स्वस्थ आंत और तनावमुक्त जीवन दोनों का आपस में गहरा संबंध है। आंत माइक्रोबायोम को मूड और तनाव को प्रभावित करने में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है। अविपत्तिकर चूर्ण के कुछ घटक स्वस्थ आंत वातावरण को बढ़ावा दे सकते हैं जिससे तनाव से मुक्ति पाने में मदद मिलती है। चूर्ण में कुछ जड़ी-बूटियाँ, जैसे त्रिफला (अमलकी, बिभीतकी और हरीतकी) में एडाप्टोजेनिक गुण हो सकते हैं जो तनाव और चिंता एडेप्ट कर लेते हैं।


7. शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है (Removes toxins from the body)

शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी Avipattikar Churna benefits in Hindi हैं। इस चूर्ण के नियमित सेवन से शरीर में मौजूद ऐसे विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं जिन्हें शरीर सही ढंग से पचा नहीं सका है। शरीर में अपशिष्ट पदार्थों के जमा होने से मानसिक भ्रम, बालों का झड़ना, थकान, भंगुर पैर के नाखून, सांसों की दुर्गंध, मतली और वजन बढ़ना जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं।

शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर करने का कार्य लीवर का होता है। अगर लीवर स्वस्थ है तो इन अपशिष्ट पदार्थों को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है। ऐसे में आंवला जैसी जड़ी-बूटियों में एंटीऑक्सीडेंट गुण हो सकते हैं जो संभावित रूप से लीवर के कार्य में सहायता कर सकते हैं, जो विषहरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही, Trivrt जैसे कुछ अवयवों में रेचक गुण हो सकते हैं, जो मल त्याग में सहायता करते हैं और आंत के माध्यम से अपशिष्ट उत्पादों को खत्म करते हैं।


8. भूख न लगने की समस्या दूर करता है (Eliminates the problem of loss of appetite)

अगर आप भूख न लगने की समस्या से परेशान हैं तो Avipattikar Churna का सेवन शुरू कर दें। इस चूर्ण के नियमित सेवन से भूख बढ़ती है। आयुर्वेद कहता है कि अगर शरीर में पित्त दोष असंतुलित हो जाए तो भूख न लगने की समस्या जन्म ले सकती है। माना जाता है कि अविपत्तिकर चूर्ण में मौजूद कुछ जड़ी-बूटियों, जैसे आंवला और बिभीतकी में शीतल गुण होते हैं जो पित्त को शांत करने और संभावित रूप से भूख को उत्तेजित करने में मदद कर सकते हैं।

साथ ही खराब पाचन और विषाक्त पदार्थ भूख न लगने की समस्या में योगदान कर सकते हैं। पाचन और अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन को बढ़ावा देकर, अविपत्तिकर चूर्ण अधिक अनुकूल पाचन वातावरण बनाने और भूख को बढ़ाने में मदद कर सकता है। यह चूर्ण आंत के स्वास्थ्य को भी बढ़ाता है जिससे भोजन के चयापचय में मदद मिलती है और भूख बढ़ती है।


9. हृदय रोगों का जोखिम कम कर सकता है (Can reduce the risk of heart diseases)

अविपत्तिकर चूर्ण के नियमित सेवन से हृदय रोगों का जोखिम भी कम होता है और हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया, इस चूर्ण में आंवला मौजूद होता है। आंवला एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और फाइबर से भरपूर होते हैं और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। आंवला खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने, धमनियों और नसों में वसा के संचय को कम करने और स्वस्थ परिसंचरण को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकता है।

इसके पश्चात इस चूर्ण में त्रिफला यानि आमलकी, बिभीतकी, और हरीतकी के भी औषधीय गुण मौजूद हैं। त्रिफला रक्त परिसंचरण और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करके और ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन से बचाकर स्वस्थ हृदय बनाए रखने में मदद कर सकता है। तो इस तरह Avipattikar Churna में मौजूद ये दोनों आयुर्वेद खाद्य पदार्थ का चूर्ण हृदय रोगों के जोखिम कम करके हृदय के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते हैं।


10. डिप्रेशन की समस्या में मददगार है (Reduce the risk of depression)

डिप्रेशन के जोखिम को कम करने में भी अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे हैं। आयुर्वेद कहता है कि अगर व्यक्ति के शरीर में पित्त दोष असंतुलित हो जाए तो चिंता, बेचैनी और प्रेरणा की कमी की भावनाएँ आ सकती हैं, जो अवसाद में योगदान कर सकती हैं। ऐसे में यह चूर्ण शरीर में पित्त दोष को शांत करता है जिससे डिप्रेशन और तनाव की समस्या से राहत मिलती है।

साथ ही, आयुर्वेद मानता है कि यह चूर्ण व्यक्ति पर antidepressants की तरह कार्य करता है। यह तनाव से मुक्ति दिलाता है और दिमाग को शांत रखने में मदद करता है। इसके सेवन से पाचन स्वास्थ्य भी बेहतर होता है जिसकी वजह से सहजता और शांति का अनुभव होता है। ये सभी फैक्टर्स तनाव से मुक्ति दिलाने में मदद करते हैं और डिप्रेशन का जोखिम कम करते हैं। तो इस तरह आपके जाना कि Avipattikar Churna Ke Fayde क्या हैं।


अविपत्तिकर चूर्ण के नुकसान (Disadvantages Of Avipattikar powder in Hindi)

अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे और नुकसान दोनों हैं। एक तरफ जहां इस चूर्ण के सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, चयापचय में सुधार आता है, त्वचा में निखार आता है, बालों में मजबूती आती है, हृदय रोगों का जोखिम कम हो जाता है, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकलते हैं तो वहीं इसके अत्यधिक सेवन से कुछ लोगों में एलर्जी, अत्यधिक गर्मी का अनुभव करना और पेट खराब होने की समस्या शुरू हो सकती है।

आमतौर पर अविपत्तिकर चूर्ण के नुकसान बिल्कुल नहीं होते हैं लेकिन इसका अत्यधिक डोज का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में इसका असर कैसा होगा, इसपर शोध की कमी है। इसलिए हम गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसके सेवन की सलाह बिलकुल भी नहीं देते हैं।


अविपत्तिकर चूर्ण का संघटन क्या है (What is the composition of Avipattikar Churna in Hindi)

अविपत्तिकर चूर्ण कई आयुर्वेदिक औषधियों के मिश्रण से बना है जो समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। इन औषधियों के सेवन से पाचन स्वास्थ्य खासतौर पर बेहतर होता है और पाचन क्रिया से जुड़े रोगों का जोखिम भी कम होता है। नीचे दिए टेबल में आप देख सकते हैं कि Avipattikar Churna Composition क्या है और इसमें मौजूद आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के फायदे क्या हैं।


जड़ बूटी

पाचन तंत्र के लिए लाभ

आंवला

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, कब्ज दूर करता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है।

बिभीतकी

अपच, कब्ज, दस्त, पेट फूलना, एसिडिटी और गैस से राहत देता है।

हरीतकी

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, कब्ज दूर करता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है।

पिप्पली

भूख बढ़ाता है, पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है।

मैरिका

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है, दस्त और उल्टी से राहत देता है।

सुंती

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है, जी मिचलाना और उल्टी से राहत देता है।

मुस्ता

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है, भूख बढ़ाता है।

पात्रा

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है, दस्त और उल्टी से राहत देता है।

लवंगा

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है, दांत दर्द से राहत देता है।

इलाइची

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है, मुंह की दुर्गंध दूर करता है।

त्रिवृत

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, कब्ज दूर करता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है।

विदा

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है, दस्त और उल्टी से राहत देता है।

विदंगा

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है, कृमिनाशक है।

सरकारा

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है, पेट की गैस और अपच को कम करता है, दस्त और उल्टी से राहत देता है।


अविपत्तिकर चूर्ण बनाने की विधि (Method of making Avipattikar powder)

अविपत्तिकर चूर्ण बनाने की विधि तो आसान है लेकिन आपको इसमें मिलाई जाने वाली औषधियों और जड़ी बूटियों को जुटाने में खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है। साथ ही घर पर इस चूर्ण को बनाना स्वास्थ्य लहजे से फायदेमंद नहीं भी हो सकता है, कारण यह कि किस जड़ी बूटी की कितनी मात्रा मिश्रित करनी है यह हर कोई नहीं जानता। साथ ही इस चूर्ण का सेवन कितनी मात्रा में किया जाना चाहिए, यह भी बिना आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह अवश्य लिया जाना चाहिए।

फिर भी आपकी जानकारी के लिए चलिए जानते हैं कि घर पर अविपत्तिकर चूर्ण बनाने की विधि क्या है:

  1. सबसे पहले आंवला, बिभीतकी, हरीतकी, पिप्पली, मैरिका, सुंती, मुस्ता, पात्रा, लवंगा, इलाइची, त्रिवृत, विदा, विदंगा और सरकारा यानि 14 औषधियों को इकट्ठा कर लें। इन्हें आप बाजार से खरीद सकते हैं, अगर घर पर उपलब्ध हो तो भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  1. इसके पश्चात इन सभी औषधियों को अच्छे से साफ कर लें ताकि कोई भी विषाक्त पदार्थ या गंदगी इनमें मौजूद न रहे। इसके पश्चात धूप में इन्हें कई दिनों तक अच्छे से सूखने दें ताकि ये चूर्ण बनाने लायक हो जाएं।
  1. जब ये अच्छे से सुख जाए तो आप ओखल या ग्राइंडर मशीन की मदद से इन्हें अच्छे से ग्राइंड कर लें यानि इनका चूर्ण तैयार कर लें। यह चूर्ण एक जैसा होना चाहिए और बिल्कुल महीन पिसाई जरूरी है।
  1. अब आयुर्वेदिक डॉक्टर द्वारा बताए गए मात्रा के अनुसार इन सभी पिसे हुए जड़ी बूटियों को आपस में मिला दें। 
  1. अंत में इस चूर्ण को आप airtight container में स्टोर करके रख दें। इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां नमी न हो ताकि ये खराब न हो। इसके पश्चात डॉक्टर द्वारा सुझाए गई मात्रा का सेवन आप रोजाना गर्म पानी के साथ कर सकते हैं।

अविपत्तिकर चूर्ण का सेवन कैसे करें (How to consume Avipattikar Churna in Hindi)

अविपत्तिकर चूर्ण का सेवन आपको किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के सलाह के पश्चात ही करना चाहिए। आमतौर पर इस चूर्ण को दिन में दो बार भोजन के पश्चात खाना चाहिए। भोजन करने के पश्चात आप इसकी 3 से 5 ग्राम मात्रा को गुनगुने पानी में अच्छे से मिलाकर सेवन कर सकते हैं। 

आयुर्वेद एक्सपर्ट्स के अनुसार इसे भोजन के पहले और भोजन के बाद दोनों समय लिया जा सकता है। जब आप इस चूर्ण का सेवन भोजन के पहले करते हैं तो हाइपरएसिडिटी की समस्या से राहत मिलती है तो वहीं अगर आप अपनी आंतों को साफ करना चाहते हैं और कब्ज की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो भोजन के पश्चात इसका सेवन करें। इस चूर्ण का सेवन आपको नियमित रूप से कम से कम 3 महीने तक करना चाहिए। उम्मीद है कि आप अविपत्तिकर चूर्ण लेने का समय समझ गए होंगे।


निष्कर्ष (Conclusion)

Avipattikar Churna uses in Hindi कई हैं। इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत बनता है, पाचन संबंधी रोगों का जोखिम कम होता है, तनाव से मुक्ति मिलती है, पित्त दोष शांत होता है, बालों और त्वचा का स्वास्थ्य बेहतर होता है, हृदय रोगों का जोखिम कम होता है, लीवर मजबूत बनती है, शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, भूख न लगने की समस्या दूर होती है और वजन प्रबंधन में मदद करता है।

हालांकि अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे कई हैं लेकिन इसका सेवन अधिक करने पर कुछ साइड इफेक्ट्स भी दिखलाई पड़ सकते हैं। इसके साइड इफेक्ट्स में एलर्जी होना, पेट खराब होना और उल्टी मितली की भावना जगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।इसका सेवन भोजन के पहले और बाद में दोनों समय किया जा सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

1. अविपत्तिकर चूर्ण की तासीर क्या होती है?

अविपत्तिकर चूर्ण की तासीर ठंडी यानि शीतल होती है। यह शरीर पर शीतल प्रभाव डालता है इसलिए गर्मी के मौसम में भी इसे खाया जा सकता है।


2. अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे क्या हैं?

अविपत्तिकर चूर्ण के कई फायदे हैं। इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत बनता है, पाचन संबंधी रोगों का जोखिम कम होता है, तनाव से मुक्ति मिलती है, पित्त दोष शांत होता है, बालों और त्वचा का स्वास्थ्य बेहतर होता है, हृदय रोगों का जोखिम कम होता है, लीवर मजबूत बनती है, शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, भूख न लगने की समस्या दूर होती है।


3. अविपत्तिकर चूर्ण कब लेना चाहिए?

अविपत्तिकर चूर्ण भोजन करने से पहले या बाद में लिया जा सकता है। दिन में दो बार इस चूर्ण का सेवन किया जाना चाहिए। इसके सेवन का तरीका है गुनगुने पानी में इसे अच्छे से मिलाएं और फिर पी जाएं।


4. अविपत्तिकर पाउडर कौन सा दोष शांत करता है?

अविपत्तिकर पित्त दोष को शांत करता है जिससे पाचन तंत्र मजबूत बनता है और भोजन अच्छे से पचता है। इस पावडर का नियमित सेवन करने से पाचन से जुड़ी बीमारियां दूर होती हैं।


References

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Dr. Shailendra Chaubey, BAMS

Ayurveda Practioner

A modern-day Vaidya with 11 years of experience. He is the founder of Dr. Shailendra Healing School that helps patients recover from chronic conditions through the Ayurvedic way of life.

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